पूरे देश को एकता के सूत्र में बांधे रखती है हिंदी
बाल लेखक अच्युतम।
“निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल,
बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटत न हिय के सूल’।”
पहला हिंदी दिवस 14 सितंबर 1953 को मनाया गया था, जब भारत के प्रधान मंत्री ने इस दिन को हिंदी दिवस के रूप में याद करने का निर्णय लिया था। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार किया। पूरे विश्व में हिंदी भाषा अंग्रेजी और मंदारिन के बाद तीसरे स्थान पर सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। भारत के साथ-साथ नेपाल, मॉरिशस, गुयाना, सूरीनाम, त्रिनिदाद, फिलीपिंस, तिब्बत, पाकिस्तान, टोबैगो और फिजी जैसे देशों में हिंदी भाषा बोली जाती है।
वैश्विक स्तर पर हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए 1975 में विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया गया था और उसके बाद से विश्व स्तर पर 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया गया। भारत में राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी दिवस 14 सितंबर को मनाया जाता है।
विश्व स्तर पर तीसरे स्थान पर सबसे अधिक बोले जानी वाली भाषा होने के कारण विश्व के कई शिक्षण संस्थानों में हिंदी भाषा की पढ़ाई भी की जाती है।
“नवयुग की इसमें धड़कन है, भावों को इसमें आशा है,
हिंदी ही हमारी मातृ और राष्ट्रभाषा है।”
हिंदी शक्ति है, शारदा है, माँ है और पूरा राष्ट्र एक परिवार है। जिस प्रकार केवल एक माँ ही अपने परिवार को एकता में बाँधे रख सकती है, सूत्र की भाँति सबको अपने में पिरो सकती है, उसी प्रकार हिन्दी हमारी भाषा है, जो पूरे राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरो सकती है। हिंदी के विशाल हृदय में देश की अखंडता, विभिन्न धर्मों का दर्शन, साधारण जन-मानस का उल्लास, भाईचारा, प्रेम, समृद्धि, उन्नति और प्रगति समाविष्ट है। हिंदी का उत्थान भारत का उत्थान है। हिंदी एक ऐसी कड़ी है जिसके टूटने पर सारा राष्ट्र बिखर सकता है और जिसके जुड़ जाने पर राष्ट्र को एकता के सूत्र में बाँधा जा सकता है।
हिंदी हमारी एकता का प्रतीक है, इसके माध्यम से हम सभी भारतीय अपनी भावनाओं को साझा करते हैं। इस भाषा का सौंदर्य, गरिमा और भावनाओं का संवाद हमारे जीवन में रंग भरता है। हिंदी हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, और हमें इसके प्रति प्यार और समर्पण दिखाना चाहिए।
“हिंदी है देवों की वाणी, परम पुरातन सुखद सुहानी।
हिंदी उतनी पावन है जितना माँ गंगा का पानी।।”
डिजिटल बाल मेला बच्चों को हिंदी के प्रति जागरूक करना चाहता है साथ ही अपील करता है कि बच्चे आधुनिकता की होड़ में अपने मातृभाषा को नहीं भूलें| बच्चों के लिए अपनी मातृभाषा “हिंदी” का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है|डिजिटल बाल मेला एक ऐसा मंच है जो बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए निरंतर कार्य कर रहा है| इसके लिए डिजिटल बाल मेला कई अभियानों का आयोजन कर चुका है| अपने बच्चे को डिजिटल बाल मेला से जोड़ने के लिए आप 8005915026 पर संपर्क करें|
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