जानिए दीयों के त्यौहार दिवाली के बारे में।
शिवाक्ष शर्मा।
दिवाली, जिसे दीपावली के नाम से भी जाना जाता है, भारत का एक प्रमुख और प्रिय त्योहार है। यह हर साल कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है, जब लोग अपने घरों को दीपों और रंग-बिरंगी लाइट्स से सजाते हैं। इस दिन माता लक्ष्मी, धन और समृद्धि की देवी, और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। दिवाली का मतलब है “दीपों की पंक्ति,” जो अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का प्रतीक है।
यह त्योहार कार्तिक माह की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। अमावस्या की अंधेरी रात जगमग असंख्य दीपों से जगमगाने लगती है। कहते हैं भगवान राम 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे, इस खुशी में अयोध्यावासियों ने दीये जलाकर उनका स्वागत किया था। श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध भी इसी दिन किया था। यह दिन भगवान महावीर स्वामी का निर्वाण दिवस भी है।
दिवाली पर सजेगी अयोध्या नगरी।
अयोध्या दीपोत्सव दिवाली के दौरान भारत के अयोध्या में मनाया जाने वाला एक भव्य उत्सव है। इस उत्सव का मुख्य आकर्षण सरयू नदी के किनारे लाखों मिट्टी के दीये जलाना है, जो एक मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करता है। इस वर्ष, इस कार्यक्रम का लक्ष्य 25 लाख दीये जलाकर एक नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना है
इस साल का दीपोत्सव खास है क्योंकि यह नवनिर्मित राम मंदिर में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहला दिवाली उत्सव है। इस कार्यक्रम में भगवान राम का प्रतीकात्मक राज्याभिषेक भी शामिल होगा, जो इस अवसर की भव्यता को और बढ़ाएगा।
डिजिटल बाल मेला की तरफ से आप सभी को दीपावली की हार्दिक बधाई। डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।
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