जानिए नेशनल वैक्सीनेशन डे के बारे में हिमाचल प्रदेश की कशिश से…

जानिए नेशनल वैक्सीनेशन डे के बारे में हिमाचल प्रदेश की कशिश से।

बाल लेखिका कशिश।

 

हमारे आसपास मौजूद वायरस और बैक्टीरिया अक्सर हमें अपनी चपेट में लेकर बीमार कर देते हैं । ऐसे में वैक्सीनेशन की मदद से इन संक्रामक बीमारियों से हम सुरक्षित रह पाते हैं ।
वैक्सीन वाइरस या बैक्टीरिया के खिलाफ हमारी रक्षा करते हुए हमें कई गंभीर बीमारियों से बचाती है । इसीलिए यह बेहद जरूरी है कि हम सब अपने लिए वैक्सीनेशन जरूरी करें। इसीलिए लोगों को वैक्सीनेशन का महत्व बताने की मकसद से हर साल 16 मार्च को “नेशनल वैक्सीनेशन डे” मनाया जाता है। इस दिन को मनाने की शुरुआत साल 1995 में हुई थी। 16 मार्च 1995 को भारत में पहली बार पोलियो वैक्सीन की पहली खुराक दी गई थी । साथ ही इस दिन भारत को पोलियो मुक्त बनाने के मकसद से सरकार ने ‘पल्स पोलियो’ अभियान की शुरुआत की थी।
इस दिन की शुरुआत भले ही बच्चों की वैक्सीन के साथ हुई हो, लेकिन इसका महत्व सभी के लिए है। दरअसल टीका सिर्फ बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि बड़े, बूढ़ों के लिए भी जरूरी होता है।
ऐसे में लोगों को उसका महत्व समझाने के मकसद से इस दिन को मनाया जाता है । WHO के मुताबिक हर साल करीब 2 से 3 मिलियन लोगों की जान टीकाकरण द्वारा बचाई जाती है।
16 मार्च 2024 के लिए “राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस” की थीम:— “वैक्सीन वर्क फॉर ऑल” अर्थात “टीके सभी के लिए काम करते हैं”।
वैक्सीन कई खतरनाक और गंभीर बीमारियों को रोकने का एक प्रभावी माध्यम है । वैक्सीन के महत्व का सबसे बड़ा उदाहरण ; हाल ही में ‘कोरोना वैक्सीनेशन’ के दौरान देखने को मिला ।
इसीलिए यह बेहद आवश्यक है कि व्यक्ति जब भी किसी बीमारी की चपेट में आए ,तो वह अपना इलाज बेहतर ढंग से और वैक्सीनेशन की मदद से अवश्य करवाए !

डिजिटल बाल मेला ने मार्च माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।

डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।

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