जानिए राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस के बारे में।
शिवाक्ष शर्मा।
भारत में हर साल 4 मार्च को राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मकसद लोगों को सुरक्षा को लेकर जागरूक करना है। इस दिन देश भर के कई संस्थानों में अवेयरनेस प्रोग्राम चलाए जाते हैं। ताकि लोगों को दुर्घटनाओं से बचने के उपाय मालूम हो।
सबसे पहले राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के स्थापना दिवस पर साल 1972 में पहली बार 4 मार्च को राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस मनाया गया था। इसे भारत सरकार, श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा 4 मार्च 1965 को सुरक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण पर एक स्वैच्छिक आंदोलन को उत्पन्न करने और विकसित करने के लिए स्थापित किया गया था। राष्ट्रीय सुरक्षा सप्ताह हर साल 4 मार्च से शुरू होकर एक सप्ताह तक मनाया जाता है। यह दिवस सुरक्षित वातावरण के लिए जागरूकता पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करने में मदद करता है। इस दिवस का एक अन्य महत्व स्वास्थ्य कल्याण को बढ़ावा देना भी है।
सभी सेक्टरों में सुरक्षा को लेकर जागरूकता फैलाना और दुर्घटनाएं में कमी लाना राष्ट्रीय सुरक्षा दिवस का उद्देश्य है। किसी सेक्टर में काम करने वाले नागरिकों की सुरक्षा के महत्व को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा सप्ताह मनाते हैं। इस दौरान हर क्षेत्र में लोगों को सेफ्टी से जुड़ी बातें बताई जाती हैं और इंडस्ट्रियल एक्सीडेंट से बचने के तरीके और इससे होने वाले नुकसान के बारे में बताया जाता है। इसके लिए कई तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
डिजिटल बाल मेला की शुरुआत जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।
वर्तमान में डिजिटल बाल मेला द्वारा बच्चों के लिए “कौन बनेगा बाल पार्षद” अभियान चलाया जा रहा है। जिसकी विस्तृत जानकारी आप डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट एवं व्हाट्सऐप चैनल पर ले सकते हैं।
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