“जेंडर सेंसिटिव राजस्थान” का हुआ शुभारंभ
वरिष्ठ पत्रकार त्रिभुवन ने कार्यशाला में मौजूद सभी पत्रकारों को बताया कि दुनिया के विकसित देशों में भी जेंडर विषय पर संवेदनशीलता की कमी है। यही वजह है कि हर क्षेत्र में लिंग भेद प्रत्यक्ष देखा जा सकता है। यूरोपिय देशों में राजनीति में महिला भागीदारे के आंकड़ों पर चिंता जताते हुये भारतीय हालात की तरफ सभी का ध्यान दिलाया।
पत्रकारिता में लंबे अनुभव के दौरान महिला सहभागियों के साथ हुये व्यवहार का ज़िक्र करते हुये उन्होंने कहा कि संपादक जैसे अहम पद पर महिलाओं को ज़िम्मेदारी नहीं दी जाती है।
राजस्थान सरकार के हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से जुड़े त्रिभुवन ने बताया कि लैंगिक संवेदनशील समाज बनाने के लिये ज़रुरी है कि नयी पीढ़ी और युवा पत्रकार अपनी खबरों में इन विषयों को प्रमुखता दे। मीडिया संस्थान महिलाओं को संपादकीय आलेखों में स्थान प्रदान करें।
गौरतलब है कि फ्यूचर सोसायटी द्वारा आयोजित और यूनिसेफ द्वारा प्रायोजित इस कार्यशाला का मकसद इक्वली सेंसिटिव समाज का निर्माण करने में मीडिया की भागीदारी पुख्ता करना था।
डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।
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