बाल लेखक पारस माली।
हर साल 19 नवंबर को अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया जाता है। एक समाज के अंदर हम किसी भी कार्य की बात करें चाहे वह विकास का हो या कोई अन्य कार्य हर कार्य बिना पुरुष अधूरा है। अगर हम देखें तो एक समाज के विकास में पुरुष और महिला दोनों का ही एक बहुत बड़ा योगदान होता है। परंतु महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए हर दिशा से काम किया जा रहे हैं। परंतु पुरुषों की भलाई और उन्होंने जो अच्छे कार्य किए हैं और जितने भी उन्होंने विकास या अन्य कार्यों में योगदान दिया है उसके प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए यह दिवस मनाया जाता है।
अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस के मौके पर लड़कों और पुरुषों समाज संघ समुदाय परिवार विवाह और बच्चों की देखभाल मैं उनके योगदान को भी सम्मानित किया जाता है।दुनिया भर के करीब 60 देशों में अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया जाता है। प्रतिवर्ष 19 नवंबर को ही अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस पूरी दुनिया में मनाया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस के मौके पर अलग-अलग देशों में अलग-अलग कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस का इतिहास।
अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाने की मांग पहली बार साल 1923 में हुई थी। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की तर्ज पर 23 फरवरी को पुरुष दिवस मनाने की मांग उठाई गई । अमेरिका ,ऑस्ट्रेलिया और माल्टा के संगठनों को पुरुष दिवस मनाने के लिए आमंत्रण किया गया। कुछ सालों तक तो संगठन इस कार्यक्रम में आते रहे। 1995 तक बहुत कम संगठन इन आयोजनों का हिस्सा बने। कुछ समय बाद इस कार्यक्रम का आयोजन बंद हो गया।वर्ष 1999 में त्रिनिदाद और टोबैगो में वेस्ट इंडीज विश्वविद्यालय के इतिहास के प्रोफेसर डॉक्टर जेरोम तिलक सिंह ने अपने पिता की जन्म दिवस को 19 नवंबर के दिन मनाया। उन्होंने इस दिन पुरुषों के मुद्दों को उठाने के लिए लोगों को जागरूक किया। इसके बाद से 19 नवंबर 2007 में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया गया।
धन्यवाद।
डिजिटल बाल मेला ने नवंबर माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।
डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।
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