रामनगर की अंजली ने बताया विश्वकर्मा दिवस का महत्त्व।

बाल लेखिका अंजली।

हर वर्ष विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर छोटे बड़े कारखानों और विशेष तौर पर औजारों निर्माण कार्य से जुड़ी मशीनों और दुकानों की पूजा की जाती है। दरअसल विश्वकर्मा जी को यंत्रों का देवता भी माना जाता है। सभी लोग इस दिन औजारों की पूजा करते हैं बिजनेस और उद्योग के धंधे में लगे लोगों की तरक्की और उनकी अच्छी होती है विश्वकर्मा पूजा करने पर व्यापार और निर्माण कार्य में आने वाली सभी तरह की परेशानी दूर हो जाती है कारखाने में लगी मशीन पूरे साल सही तरीके से कार्य करती हैं।

पूजा विधि

सबसे पहले विश्वकर्मा जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ सुथरा कपड़े पहने और पूजा करें कारखाने ,प्रतिष्ठानों, हजारों और मशीनों आदि की साफ सफाई करके वहां पर विश्वकर्मा जी की मूर्ति को स्थापित करें और फिर उनकी पूजा करें।

विश्वकर्मा जी को दुनिया का पहला इंजीनियर माना जाता है धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था अंत में मैं आपसे यही कहना चाहती हूं कि इस दिन को खुशी मनाना चाहिए ।

अंत : आप सभी को विश्वकर्मा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

धन्यवाद।

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डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।

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