विश्व खाद्य दिवस है आज…

पारस माली ने बताया है इस दिन का महत्व …

बाल लेखक पारस माली

जाने 16 अक्टूबर को क्यों मनाया जाता है विश्व खाद्य दिवस। हर वर्ष 16 अक्टूबर को विश्व खाद्य दिवस मनाया जाता है। विश्व खाद्य दिवस मनाने की शुरुआत 16 अक्टूबर 1945 को हुई थी । इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य अक्सर हम देखते हैं की दुनिया भुखमरी से जूझ रही है उन्हें एक वक्त का खाना भी नहीं मिल पा रहा और दूसरी तरफ फैक्ट्री के अंदर अनाज खराब हो रहा है और किसी को भी खाने के लिए नहीं मिल इसी समस्या के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना बढ़ाना इस कार्यक्रम का उद्देश्य है। अगर हम भारत की बात करें तो भारत के गोदाम में अनाज खराब हो रहे हैं इसके बावजूद करोड़ों लोग भूखे । दुनिया में जितने भी लोग भुखमरी के शिकार हैं उनमें से एक चौथाई लोग सिर्फ भारत में रहते हैं। भारत देश में सबसे ज्यादा लोग भूखे रह रहे हैं। और एक तरफ दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं जो शादी विवाह पार्टियों में बहुत ज्यादा खाना बर्बाद करते हैं। देश भारत में लोग भूख के कारण अपनी जान गवा रहे हैं। और अगर हम बात करें जमीन की तो भारत के अंदर ही सबसे ज्यादा जमीन है परंतु खेती करने के लिए कृषि साधन की सुविधा नहीं है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था की दुनिया में सी भुखमरी को खत्म करना। लेकिन इस कार्यक्रम की शुरुआत के इतने साल बाद आज भी दुनिया के करोड़ों लोगों को हम दो वक्त की रोटी नहीं दे पा रहे हैं आज की पूरी विश्व के लिए एक शर्म की बात है कि लोग भूखे सो रहे हैं जहां दूसरी तरफ देखें तो गोदाम में अनाज खराब हो रहे हैं। अंत में मैं आप सभी को एक संदेश देना चाहूंगा कि हमें ऐसे लोगों की मदद करनी चाहिए उन्हें भोजन करवाना चाहिए की जिससे एक गरीब व्यक्ति को एक वक्त की रोटी प्राप्त हो। और मैं डिजिटल बाल मेला के माध्यम से सभी बच्चों को कहना चाहूंगा घर पर कभी भी कोई भी गरीब व्यक्ति आए तो उसको कभी भी पैसे नहीं देनी चाहिए उन्हें अच्छा भोजन करवाना चाहिए की जिससे वह अपना जीवन जी सके धन्यवाद जय हिंद जय भारत

डिजिटल बाल मेला बच्चों के बीच जागरूकता पैदा करने और उनकी कला को प्रदर्शित करने के लिए बच्चों द्वारा स्थापित एक मंच है।

 

डिजिटल बाल मेला ने सितंबर एवं अक्तूबर माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को उनकी फोटो के साथ डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।

 

डिजिटल बाल मेला बच्चों के लिए अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता दिखाने का एक अभिनव मंच है। इसकी शुरुआत 2020 में जयपुर की 10 वर्षीय लड़की जान्हवी शर्मा ने की थी। डिजिटल बाल मेला ने अब तक कई अभियान चलाए हैं जिनमें “राजस्थान विधानसभा बाल सत्र”, “हिमाचल प्रदेश विधानसभा बाल सत्र”, “मैं भी” शामिल हैं। बाल सरपंच” आदि।

 

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