विश्व कपास दिवस का उद्देश्य कपास उत्पादन के लिए सभी जरूरी बदलाव करना, कपास प्रोडक्शन की तकनीकों के विकास को बढ़ावा देना, इस काम से जुड़े सभी लोगों को एक साथ जोड़े रखना और ज्यादा से ज्यादा रोजगार के अवसर प्रदान करना है।
बाल लेखिका वैशाली।
विश्व कपास दिवस(World Cotton Day) 7 अक्टूबर को विश्व स्तर पर मनाया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय दिवस का उद्देश्य कपास के लाभों का महत्व बताना है, जिसमें प्राकृतिक फाइबर के रूप में इसके गुणों से लेकर लोगों को इसके उत्पादन, परिवर्तन, व्यापार और उपभोग से प्राप्त होने वाले लाभ शामिल हैं। पुराने समय से कॉटन के कपड़ो से लेकर कपास को कई अन्य तरह से भी इस्तेमाल किया जाता रहा है। कपास का प्रोडक्शन ना केवल भारत बल्कि पूरे विश्व में बड़े पैमाने पर किया जाता है, इसीलिए कपास का उत्पादन हर साल काफी लोगों जरूरतमंद लोगों को रोजगार देता है।
विश्व कपास दिवस का उद्देश्य कपास उत्पादन के लिए सभी जरूरी बदलाव करना, कपास प्रोडक्शन की तकनीकों के विकास को बढ़ावा देना, इस काम से जुड़े सभी लोगों को एक साथ जोड़े रखना और ज्यादा से ज्यादा रोजगार के अवसर प्रदान करना है।
विश्व कपास दिवस का उद्देश्य कपास उत्पादन के लिए सभी जरूरी बदलाव करना, कपास प्रोडक्शन की तकनीकों के विकास को बढ़ावा देना, इस काम से जुड़े सभी लोगों को एक साथ जोड़े रखना और ज्यादा से ज्यादा रोजगार के अवसर प्रदान करना है।
कपास की खेती का विकास और संवर्धन संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के सतत विकास लक्ष्यों का हिस्सा है। लक्ष्यों को पूरा करने के लिए, विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ), व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनसीटीएडी) और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार केंद्र (आईटीसी) ने कपास के उप-उत्पादों पर एक संयुक्त पहल की। यह पहल “कॉटन -4” राष्ट्रों को सहायता प्रदान करती है, जो कि बेनिन, बुर्किना फासो, चाड और माली और अफ्रीका के अन्य कपास उत्पादक देश हैं, जो कपास के उप-उत्पादों और इसके बाजारों को विकसित करने के लिए हैं।
कपास-4 देशों द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) में औपचारिक अपील के जवाब में, 7 अक्टूबर, 2019 को, विश्व व्यापार संगठन सचिवालय, अंतर्राष्ट्रीय कपास सलाहकार समिति के सचिवालयों के सहयोग से। आईटीसी ने जिनेवा में पहले विश्व कपास दिवस कार्यक्रम की मेजबानी की।
कपास पांच महाद्वीपों के 75 से अधिक देशों में उगाई जाती है और दुनिया भर में इसका कारोबार होता है। यह दिन सबसे कम विकसित देशों (एलडीसी) में नौकरियां पैदा करने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में अपनी भूमिका को उजागर करने का एक अवसर है। इस दिन का उद्देश्य स्थायी व्यापार नीतियों को बढ़ावा देना और विकासशील देशों को कपास मूल्य श्रृंखला के हर चरण से लाभान्वित करने में सक्षम बनाना है।
डिजिटल बाल मेला बच्चों के बीच जागरूकता पैदा करने और उनकी कला को प्रदर्शित करने के लिए बच्चों द्वारा स्थापित एक मंच है।
डिजिटल बाल मेला ने सितंबर एवं अक्तूबर माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को उनकी फोटो के साथ डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।
डिजिटल बाल मेला बच्चों के लिए अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता दिखाने का एक अभिनव मंच है। इसकी शुरुआत 2020 में जयपुर की 10 वर्षीय लड़की जान्हवी शर्मा ने की थी। डिजिटल बाल मेला ने अब तक कई अभियान चलाए हैं जिनमें “राजस्थान विधानसभा बाल सत्र”, “हिमाचल प्रदेश विधानसभा बाल सत्र”, “मैं भी” शामिल हैं। बाल सरपंच” आदि।
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