हिमाचल प्रदेश विधानसभा “बाल सत्र” में नियम 324 के तहत दिया सरकार को सुझाव…
आदित्य शर्मा.
शिमला. हिमाचल प्रदेश राज्य में गहराता वित्तीय संकट किसी से भी अछूता नहीं रहा है, हाल ही में बनी नई सरकार इस समस्या के समाधान हेतु भरसक प्रयास कर रही है. सरकार के साथ इस संकट के प्रति बच्चे भी सजग है और हिमाचल के बच्चे सम्पूर्ण प्रयास कर रहे है, अपने राज्य को इस से बाहर निकालने का. अगर आपको विश्वास नहीं है तो आप हिमाचल प्रदेश विधानसभा “बाल सत्र” में गगरेट से चयनित बाल विधायक कृष्णा का सुझाव ही पढ़ लें, जिसमें उन्होंने हिमाचल प्रदेश में नए पर्यटन स्थलों की संभावनाओं को खोजने हेतु विस्तार से अपना सुझाव सदन में रखा.
उन्होंने उप-सभापति महोदय के माध्यम से बताया कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा हिस्सा पर्यटन के माध्यम से आता है. ये भी जब, तब राज्य में पर्यटन के नाम पर मात्र कुछ गिने चुने क्षेत्र ही विकसित किये गए है, इनमें शिमला, कुल्लू ,मनाली, स्पीति, कसोल, मलाना मुख्य है. ऐसे में अगर हमारे राज्य के गांवों में भी पर्यटन स्थल विकसित किये जाना भी संभव है, क्योंकि हिमाचल में मन-मोह लेने वाले दृश्यों की कमी नहीं है. इतना ही नहीं सांस्कृतिक पर्यटन के साथ ही नेचुरोपैथी की भी हिमाचल में असीमित संभावनाएं है. इन संभावनाओं में रोमांचक खेल भी शामिल है जिनमें रिवर राफ्टिंग, कयाकिंग, पैराग्लाइडिंग जैसे कई खेल शामिल है. उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि राज्य की वित्तीय स्थिति में सुधार लाने के लिए यह प्रयास किये जाने चाहिए.
हिमाचल प्रदेश विधानसभा बाल सत्र-
डिजिटल बाल मेला की को-फाउंडर प्रिया शर्मा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश की विधानसभा बाल सत्र में उठाये गए मुद्दे और सुझाव बच्चों के विचार थे. इस सत्र के दौरान विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद राज्यसभा उपसभापति श्री हरिवंश ने “बाल सत्र” की पहल को सराहा और कहा कि- हर राज्य में बाल सत्रों का आयोजन होना चाहिए, इससे बच्चे राजनीति को दल-दल न समझते हुए, इसमें सहभागिता सुनिश्चित कर सकेंगे.
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