अंत्योदय दिवस हमें याद दिलाता है कि समाज का विकास सभी की प्रगति से संबंधित है।
बाल लेखक तुषार आनंद
अंत्योदय दिवस: समाज में सेवा का महत्व
अंत्योदय दिवस हर साल 25 सितंबर को मनाया जाता है। यह एक महत्वपूर्ण दिन है जो समाज में सेवा और सहानुभूति के महत्व को बढ़ावा देता है।
यह दिवस पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
अंत्योदय दिवस हमें याद दिलाता है कि समाज का विकास सभी की प्रगति से संबंधित है। यह एक ऐसा दिन है जिसे समाज में सेवा और सहानुभूति के लिए समर्पित किया जाता है, विशेषकर उन लोगों के लिए जो सबसे आवश्यकता में हैं। इस दिन को मनाना हमें एक बेहतर समाज की दिशा में प्रेरित करता है, जो समृद्धि, समानता और सभी की उन्नति की दिशा में है।
अंत्योदय शब्द संस्कृत भाषा का है, जिसका अर्थ होता है “सर्वोत्तम भाग्य” या “सबका उन्नत भाग्य”। यह संदेश देता है कि समाज का विकास हम सभी की प्रगति से जुड़ा है और सभी को समृद्धि और सम्मान मिलना चाहिए।
अंत्योदय दिवस हमारे समाज में सेवा और सहानुभूति के महत्व को स्वीकार करने के लिए एक महत्वपूर्ण मौका है। यह हमें एक ऐसे समाज की दिशा में प्रेरित करता है जो समृद्धि, समानता और सभी की उन्नति की दिशा में है। इस दिन का महत्व हमें विश्व समृद्धि और समानता के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है, साथ ही हमें विभिन्न आर्थिक, सामाजिक और पारिस्थितिक परिवर्तनों में योगदान करने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि समाज का विकास सभी की प्रगति से संबंधित है और सभी को समृद्धि और सम्मान मिलना चाहिए। इसे मनाकर हम सभी सकारात्मक परिवर्तनों की ओर अग्रसर हो सकते हैं और एक बेहतर भविष्य की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।
– तुषार आनंद
डिजिटल बाल मेला बच्चों के बीच जागरूकता पैदा करने और उनकी कला को प्रदर्शित करने के लिए बच्चों द्वारा स्थापित एक मंच है।
डिजिटल बाल मेला ने सितंबर माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को उनकी फोटो के साथ डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।
डिजिटल बाल मेला बच्चों के लिए अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता दिखाने का एक अभिनव मंच है। इसकी शुरुआत 2020 में जयपुर की 10 वर्षीय लड़की जान्हवी शर्मा ने की थी। डिजिटल बाल मेला ने अब तक कई अभियान चलाए हैं जिनमें “राजस्थान विधानसभा बाल सत्र”, “हिमाचल प्रदेश विधानसभा बाल सत्र”, “मैं भी” शामिल हैं। बाल सरपंच” आदि।
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