जानें राजस्थान के पारस माली द्वारा लिखे इस आर्टिकल में।
बाल लेखक पारस माली।
हर वर्ष 15 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस मनाया जाता है। इस दिवस की स्थापना ग्रामीण महिलाओं के हौसलों को पूरी दुनिया के सामने लाने और उन्हें सम्मानित करने के उद्देश्य से वर्ष 1995 में बीजिंग मे आयोजित महिलाओं पर चौथे विश्व कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठनों द्वारा विशेष दिवस के रूप में की गई थी। ग्रामीण महिलाओं का पहला अंतर्राष्ट्रीय दिवस 15 अक्टूबर 2008 को मनाया गया था। इस नए अंतरराष्ट्रीय दिवस की स्थापना महासभा ने वर्ष 2007 में अपनी संकल्प 62/ 136 में की थी। इस दिन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य इस दर्द के बारे में जागरूकता पैदा करना जो ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं हैं। वह किसी से भी कम नहीं है उनकी भी भागीदारी हर चीज में होनी चाहिए और आज की समय में हम देखें तो देश में ग्रामीण क्षेत्र की जो महिलाएं हैं उनकी हर चीज में भागीदारी है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य है स्थानीय महिलाओं सहित ग्रामीण महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका में योगदान को मान्यता देना है। सबसे बड़ी जो समस्या है ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के लिए, वह य़ह है कि उनको शिक्षा नहीं मिल पाती इन्हीं सभी समस्याओं को दुनिया के सामने लाना और इन समस्याओं का सामना करने के बाद जो ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं कामयाब हुई है उनको सम्मानित करना और उनका मनोबल बढ़ाना इस दिवस का मुख्य उद्देश्य है।
आप सभी को डिजिटल बाल मेला की ओर से मैं पारस माली अंतर्राष्ट्रीय ग्रामीण महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देना चाहूंगा।
डिजिटल बाल मेला बच्चों के बीच जागरूकता पैदा करने और उनकी कला को प्रदर्शित करने के लिए बच्चों द्वारा स्थापित एक मंच है।
डिजिटल बाल मेला ने सितंबर एवं अक्तूबर माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को उनकी फोटो के साथ डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।
डिजिटल बाल मेला बच्चों के लिए अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता दिखाने का एक अभिनव मंच है। इसकी शुरुआत 2020 में जयपुर की 10 वर्षीय लड़की जान्हवी शर्मा ने की थी। डिजिटल बाल मेला ने अब तक कई अभियान चलाए हैं जिनमें “राजस्थान विधानसभा बाल सत्र”, “हिमाचल प्रदेश विधानसभा बाल सत्र”, “मैं भी” शामिल हैं। बाल सरपंच” आदि।
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