जानिए अंतरराष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस के बारे में।
शिवाक्ष शर्मा।
अंतरराष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस हर साल 30 मार्च को मनाया जाता है। इसका मकसद वैश्विक स्तर पर अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देना और टिकाऊ उत्पादन और उपभोग को बढ़ावा देना है। इस दिन को मनाने का मकसद, शून्य-अपशिष्ट पहलों के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है।
वर्ष 2017 में वैश्विक अपशिष्ट संकट के बारे में बढ़ती चिंता से प्रेरित होकर, पर्यावरण समुदायों में कचरे के बारे में जागरूकता बढ़ी। इसे लेकर शून्य-अपशिष्ट समाधान को बढ़ावा देने के लिए एक समर्पित दिन की अवधारणा उभरकर सामने आई। कचरे का निपटारा करने की तात्कालिकता और महत्व को पहचानते हुए, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा (यूएनईए) ने 14 दिसंबर 2022 को एक प्रस्ताव अपनाया। इसमें 30 मार्च को शून्य अपशिष्ट के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में घोषित किया गया। इस प्रस्ताव को तुर्किये द्वारा लाया गया और 105 अन्य देश इसे प्रायोजित करने में शामिल हो गये।
फैशन और वस्त्र उद्योग संसाधन-गहन और अपशिष्ट उत्पन्न करने वाला प्रमुख क्षेत्र है, जो पर्यावरणीय क्षति में महत्वपूर्ण योगदान देता है। इस वर्ष का अंतर्राष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस फैशन और वस्त्र क्षेत्र में अपशिष्ट प्रबंधन पर केंद्रित है और इसका विषय है “Towards Zero Waste in Fashion and Textiles।”
डिजिटल बाल मेला की शुरुआत जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।
वर्तमान में डिजिटल बाल मेला द्वारा बच्चों के लिए “कौन बनेगा बाल पार्षद” अभियान चलाया जा रहा है। जिसकी विस्तृत जानकारी आप डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट एवं व्हाट्सऐप चैनल पर ले सकते हैं।
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