कैसी होती है इनकी जीवनशैली…
गर्वित शर्मा
जयपुर: आदिवासी भारत में एक बड़ी जनसँख्या है| 2011 की जनगणना के अनुसार देश की आबादी में 8 प्रतिशत आदिवासी है| आज के इस लेख में पढ़िए, आदिवासी कौन है तथा इनकी जीवनशैली कैसी होती है..
आदिवासी ;- आदिवासियों शब्द का प्रयोग किसी भी क्षेत्र के उन निवासियों के लिए किया जाता है जिनका उस क्षेत्र के इतिहास से सबसे पुराना सम्बन्ध हो | साधारण भाषा में कहें तो किसी भी क्षेत्र के सबसे पुराने निवासी, आदिवासी है| ये आदिवासी प्रकृति के उपासक हैं|
सामाजिक कार्यकर्ता राकेश देवडे़ बिरसावादी जयस बिरसा ब्रिगेड के अनुसार यदि देखा जाये तो – “आदिवासी भारत भूमि का इंडिजिनियस एबोरिजन आदिवासी गणसमूह है जो अरावली विंध्याचल, सतपुड़ा, सह्याद्री, पर्वत माला और चंबल, बनास, लूनी, साबरमती, माही, नर्मदा, ताप्ती और गोदावरी नदियों की उत्पत्ति काल से भारत की मूल मिट्टी, पानी और हवा में जन्मा उपजा मूलबीज, मूल वंश है।”
भारत में प्रमुख आदिवासी क्षेत्र :- भारत में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां आदिवासियों की संख्या काफी अधिक है| ये क्षेत्र आदिवासी उत्तर पूर्वीय क्षेत्र के अंतर्गत हिमालय अंचल के अतिरिक्त तिस्ता उपत्यका और ब्रह्मपुत्र की यमुना-पद्या-शाखा के पूर्वी भाग में निवास करते हैं| मध्यक्षेत्र में उत्तर-प्रदेश के मिर्जापुर जिले के दक्षिणी और राजमहल पर्वतमाला के पश्चिमी भाग से लेकर दक्षिण की गोदावरी नदी तक आदिवासी समूह निवास करते है| मध्य पश्चिम राजस्थान से होकर दक्षिण में सह्याद्रि तक का पश्चिमी प्रदेश में तथा गोदावरी के दक्षिण से कन्याकुमारी तक भी आदिवासी समूह बड़ी संख्या में निवास करते हैं|
देश में प्रमुख आदिवासी समूह:- देश में कई आदिवासी समूह निवास करते हैं| इनमें से गुरूंग, लिंबू, लेपचा, आका, डाफला, अबोर, मिरी, मिशमी, सिंगपी, मिकिर, राम, कवारी, गारो, खासी, नाग, कुकी, लुशाई, चकमा, भील, मीणा, ठाकूर, कटकरी, टोकरे कोली, कोली महादेव, मन्नेवार, गोंड, कोलाम, हलबा, पावरा, संथाल, मुंडा, माहली, उरांव, हो, भूमिज, खड़िया, बिरहोर, जुआंग, खोंड, सवरा, गोंड, भील, बैगा, कोरकू, कमार, चेंचू, कोंडा, रेड्डी, राजगोंड, कोया, कोलाम, कोटा, कुरूंबा, बडागा, टोडा, काडर, मलायन, मुशुवन, उराली, कनिक्कर आदि ऐसे समूह हैं जो भारत में पिछले लम्बे समय से रहते आ रहे हैं|
आदिवासियों की संस्कृति एवं जीवनशैली :- आदिवासी अधिकतर जंगलों में निवास करते हैं| इनकी आवश्यकताएं बिल्कुल बुनियादी होती है| ये लोग जंगल से जुड़े होते हैं और जंगल को बचाने के लिए कुछ भी करते को तैयार रहते हैं| इनकी बुनियादी आवश्यकताओं में जल, जंगल और जमीन है| इनके आय के स्त्रोत भी जंगलों पर ही निर्भर करते हैं| जंगलों में पायी जाने वाली वनस्पतियाँ, लकड़ियाँ, फल, जानवरों का मांस आदि इनकी आय के प्रमुख स्त्रोत होते हैं| 1951 से पूर्व इन्हें अलग धर्म में रखा जाता था लेकिन 1951 की जनगणना में इन्हें हिन्दू धर्म में शामिल किया गया | भारत में हिंदू धर्म की संस्कृति इनमें देखी जाती है और वो सनातन के वँशज कहलाते है|
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