राजस्थान के पारस माली ने अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस का बताया इतिहास एवं महत्त्व।

बाल लेखक पारस माली।

 दुनिया में कलाकारों को भगवान का दर्जा दिया गया है ऐसा क्यों क्योंकि कलाकार हमें अलग-अलग रूप में दिखाते हैं वह हमें भगवान के रूप में अगर हम बात करें तो वह एक नॉर्मल इंसान के रूप में भी हमें दिखाई देते हैं और हमें कलाकारों से बहुत कुछ सीखने को मिलता है इसी मेहनत को पूरी दुनिया के सामने सम्मानित करने के लिए 25 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है कहते हैं कल के बिना कोई इतिहास नहीं अगर कला नहीं होती तो हमें आज अपने जीवन के बारे में पता ही नहीं चल पाता हम अपने जीवन श्रेणी से वंचित रह जाते। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य कलाकारों और समाज में उनके योगदान का सम्मान करना है और उन्होंने जो अपने जीवन में मेहनत की है उसको पूरी दुनिया के सामने लाना है।

अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस का इतिहास।

अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस वर्ष 2004 से मनाया जा रहा है। इस दिन का उत्सव प्रसिद्ध स्पेनिश चित्रकार पाब्लो पिकासो के जन्मदिन पर मनाया जाता है। और इस दिन बड़ी धूमधाम से अंतर्राष्ट्रीय कलाकार दिवस पूरी दुनिया में मनाया जाता है। अगर हम भारत की बात करें तो भारत में कलाकारों का प्रभाव बढ़ रहा है धीरे-धीरे हमारे सामने अलग-अलग रूप में कलाकार आ रहे हैं कुछ कलाकार संगीत के रूप में कुछ नृत्य के रूप में कुछ एक्टिंग के रूप में हमारे सामने आ रहे हैं। अंत में कहना चाहूंगा की कलाकार चाहे किसी भी रूप में आपके सामने हो हमें उनका सम्मान करना चाहिए उनका आदर करना चाहिए कि जिससे आने वाले समय में हमें कुछ और नई चीज़ सीखने को मिले।

धन्यवाद

डिजिटल बाल मेला बच्चों के बीच जागरूकता पैदा करने और उनकी कला को प्रदर्शित करने के लिए बच्चों द्वारा स्थापित एक मंच है।

डिजिटल बाल मेला ने सितंबर एवं अक्तूबर माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।

डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।

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