राजस्थान के पारस माली ने बताया विश्व सुनामी जागरूकता दिवस का इतिहास व इसे मनाने का कारण।

बाल लेखक पारस माली।

विश्व सुनामी दिवस हर साल 5 नवंबर को मनाया जाता है। बार-बार सुनामी के कड़वे अनुभवों के कारण जापान को इस दिवस को शुरू करने का श्रेय दिया जाता है। पिछले कुछ सालों से हमें सुनामी की बहुत सारी चेतावनियां मिली है और जहां सुनामी आई है वहां सब कुछ समाप्त हो गया वहां कुछ नहीं बचा इसलिए संयुक्त राष्ट्र ने इस दिन को सुनामी के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए विश्व सुनामी दिवस की शुरुआत की। जिससे ये सुनिश्चित किया जा सके कि जब सुनामी की चेतावनी उन तक पहुंचे तो समुदाय घबराए ना और तरीके से सारा कार्य करें। अक्सर हम देखते हैं सुनामी की चेतावनी मिलने के बाद लोगों के अंदर डर बैठ जाता है और लोग सुनामी से लड़ नहीं पाते इसी चीज को देखते हुए विश्व सुनामी दिवस मनाया जा रहा है।

  विश्व सुनामी जागरूकता दिवस का इतिहास।

  22 दिसंबर 2015 को संयुक्त राष्ट्र ने संकल्प 70 23 के माध्यम से 5 नवंबर को विश्व सुनामी दिवस जागरूकता दिवस के रूप में घोषित किया। इसकी कोई सीमा नहीं कब कितनी तबाही कभी भी हो सकती है। इसी को देखते हुए लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना है। पिछले 100 वर्षों में हम बात करें तो 58 सुनामी ने 2,60,000 से अधिक लोगों की जान गई है। उन 100 वर्षों के दौरान सबसे अधिक मौतें दिसंबर 2004 में हुई जब हिंद महासागर में सुनामी आई थी। इसने इंडोनेशिया श्रीलंका भारत और थाईलैंड सहित 14 देश में लगभग 2,27,000 जान ले ली।

 अंत में कहना चाहूंगा अगर सुनामी जैसी कोई भी आपदा आए तो हमें डरना नहीं है उसे आपदा का सामना करना है।

धन्यवाद।

डिजिटल बाल मेला बच्चों के बीच जागरूकता पैदा करने और उनकी कला को प्रदर्शित करने के लिए बच्चों द्वारा स्थापित एक मंच है।

डिजिटल बाल मेला ने नवंबर माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।

डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।

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