सोलन के यथार्थ ने विश्व नदी दिवस पर नदियों के महत्व के बारे मे रखी अपनी बात। 

नदियों को हमारे देश में जीवनदायनी भी कहा जाता है। हम उस देश में रहते हैं जहाँ नदियों को प्राचीन समय से ही माता की तरह पूजा जाता। 

बाल लेखक यथार्थ। 

विश्व नदी दिवस हर साल सितम्बर के चौथे रविवार को मनाया जाता है। इस दिन लोगों को नदियों का महत्त्व समझाया जाता है तथा इन्हें बचाने का सन्देश दिया जाता है। नदियों को हमारे देश में जीवनदायनी भी कहा जाता है। हम उस देश में रहते हैं जहाँ नदियों को प्राचीन समय से ही माता की तरह पूजा जाता। प्राचीन काल की हरप्पा सभ्यता भी सिंधु नदी के किनारे बसी थी क्योंकि उन्हें भी पता था की नदियां जीवन के लिए बहुत ज़रूरी है। हरप्पा और मिस्र जैसी और भी कई सभ्यताएं प्राचीन काल से ही नदियों की एहमियत जानती थी, पर आज के समय के लोग इसकी एहमियत को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं l नदी एक बहुत ज़रूरी जल स्त्रोत है। हम किसी भी तरह से नदियों पर अपनी निर्भरता को नाकार नहीं सकते। यह नदियां जिन्हे हम माँ कहते हैं उन्हें हम ही ख़त्म कर रहे हैं। कभी फैक्टरियों का गन्दा पानी नदियों में डालकर तो कभी आस्था के नाम पर नदियों में फूल आदि सामग्री बहकर और कभी अवैध खनन करके। अगर ऐसे ही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब हमें अपना अस्तित्व बचाने के लिए पहले नदियों को बचाना पड़ेगा और तब बहुत देर हो चुकी होगी। नदियों को बचाने के लिए सरकारों की तरफ से कई योजनाएं चलायी गयी हैं लेकिन हमें यह सोचने की ज़रूरत है की हम अपनी तरफ से इसके लिए क्या कर सकते हैं। नदियों को स्वच्छ रखना हमारी भी ज़िम्मेदारी है। इसलिए हमें आज और अभी से नदियों को बचने और स्वच्छ रखने का प्रण लेना चाहिए।

यथार्थ टकोलर।

डिजिटल बाल मेला बच्चों के बीच जागरूकता पैदा करने और उनकी कला को प्रदर्शित करने के लिए बच्चों द्वारा स्थापित एक मंच है।

डिजिटल बाल मेला ने सितंबर माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को उनकी फोटो के साथ डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।

  डिजिटल बाल मेला बच्चों के लिए अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता दिखाने का एक अभिनव मंच है। इसकी शुरुआत 2020 में जयपुर की 10 वर्षीय लड़की जान्हवी शर्मा ने की थी। डिजिटल बाल मेला ने अब तक कई अभियान चलाए हैं जिनमें “राजस्थान विधानसभा बाल सत्र”, “हिमाचल प्रदेश विधानसभा बाल सत्र”, “मैं भी” शामिल हैं। बाल सरपंच” आदि।

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