हिमाचल प्रदेश की कशिश ने दी अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी दिवस की जानकारी।

अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी दिवस को हर साल 18 दिसंबर को विश्व स्तर पर मनाया जाता है।

बाल लेखिका कशिश।

अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी दिवस पर बात करने से पहले जानते है की प्रवासी कौन होते है।

प्रवासी से अभिप्राय दुनिया के वे लोग होते हैं जो अंतरराष्ट्रीय सीमा को पार कर किसी अन्य देश में निवास करते है उन्हे ‘प्रवासी’ कहा जाता है।

दूसरे देशों में जाकर बसने वालों को अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी कहते है। 18 दिसंबर,1990 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सभी प्रवासियों के अधिकारों और उनके परिवारों को संरक्षण प्रदान करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन को अपनाया।4 दिसंबर ,2000 को महासभा ने दुनिया में प्रवासियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए 18 दिसंबर को ‘अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला किया।

अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी दिवस को हर साल 18 दिसंबर को विश्व स्तर पर मनाया जाता है।इस दिन को संयुक्त राष्ट्र द्वारा संयुक्त राष्ट्र से संबंधित एजेंसी ’इंटरनेशनल ऑर्गन इजेशन फॉर माइग्रेशन’(IOM) के माध्यम से चिह्नित किया जाता है।

2023 का थीम : ‘सुरक्षित प्रवासन को बढ़ावा देना है।’

वर्तमान समय में यूरोप और एशिया में सबसे अधिक अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी है।संयुक्त राज्य अमेरिका में किसी भी अन्य देश से अधिक अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी है।भारत विश्व के प्रवासियों के लिए शीर्ष का मूल देश बना है।हाल के दशकों में अंतर्राष्ट्रीय प्रवासियों में पुरुषों की हिस्सेदारी बड़ी है।

क्षेत्रीय, द्विपक्षीय और वैश्विक स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और प्रवासन को बड़ाने के महत्व को रेखांकित करने के लिए वैश्विक समुदाय द्वारा इस दिन की स्थापना की गई थी।

अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी दिवस यह निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है की गरीबी या आपदा जैसे पर्यावरणीय मुद्दो के कारण व्यक्तियों का आंदोलन मजबूत या सवेछिक है या नहीं !

डिजिटल बाल मेला ने दिसंबर माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।

डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।

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