जानें- क्या असम, मेघालय में खेली जाती है होली….
आदित्य शर्मा.
जयपुर. हम पूरा देश घूमकर अब आ गए है पूर्वोत्तर भारत में, आज के इस लेख में हम जानेंगे की भारत के पूर्वी हिस्से में होली कैसे खेली जाती है. पूर्वोत्तर में होली का एक अलग चलन है, होली पर रंगों के जगह नाच-गाना और लोक-खेल होते है. हालाँकि गुवाहाटी, बंगाल में रंगों की होली देखने को मिल जाती है.
आइये जानते है कैसे मानते है पूर्वोत्तर के भारतीय होली का त्यौहार-
याओसांग-
पूर्वोत्तर भारत के मणिपुर राज्य में होली को “याओसांग” के नाम से जाना जाता है. 6 दिवसीय इस त्यौहार के चलते एक झोपड़ी नदी किनारे बनाई जाती है पर अब सड़क किनारे भी बनाई जाने लगी हैं। इसमें चैतन्य महाप्रभु की प्रतिमा स्थापित की जाती है। पूजन के बाद प्रतिमा से चैतन्य महाप्रभु की प्रतिमा निकालकर झोपड़ी को होली के अलाव की तरह जला दी जाती है। याओसांग की राख को लोग अपने माथे पर और अपने घरों की चौखट पर लगाते हैं. योसांग के दौरान, लोग विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों में भी भाग लेते हैं, जैसे पारंपरिक नृत्य, संगीत, खेल और खेल. योसांग के मुख्य आकर्षण में से एक थाबल चोंगबा नृत्य है, जहां लड़के और लड़कियां हाथ पकड़कर ढोल (ड्रम) और पेना (तार वाले वाद्य यंत्र) की ताल पर अलाव के चारों ओर नृत्य करते हैं.
असम होली को ‘फगवाह‘ या ‘देओल‘ कहते हैं। त्रिपुरा, नगालैंड, सिक्किम और मेघालय में भी होली की धूम रहती है। यहां होली को भिन्न प्रकार के संगीत समारोह के रूप में मनाया जाता है, जिसे बैठकी होली, खड़ी होली और महिला होली कहते हैं।
डिजिटल बाल मेला का इन लेख को प्रकाशित करने के पीछे का मकसद बच्चों में देश और दुनिया में होने वाली विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों की जानकारी देना है. “म्यूजियम थ्रू माय आईज “ पेंटिंग प्रदर्शनी भी बच्चों को संस्कृति और इतिहास से जोड़ने का ही प्रयास था. इस प्रदर्शनी में बच्चों द्वारा बनायीं गयी देश-विदेश के संग्रहालयों की पेंटिंग प्रदर्शित की गयी थी.
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