उत्तराखंड के प्रियांशु भट्ट ने हेम्प के पोधे को क़ानूनी करार देने पर क्यों दिया जोर.

प्रियांशु भट्ट

इससे हिमाचल प्रदेश पर क्या पड़ेगा असर- जानें…

आदित्य शर्मा.

शिमला. हिमाचल प्रदेश राज्य में 12 जून को आयोजित विधानसभा  “बाल सत्र” में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व कोटद्वार के बाल विधायक प्रियांशु भट्ट द्वारा किया गया. इस विशेष सत्र में उन्होंने हिमाचल प्रदेश सरकार को हेम्प की खेती को क़ानूनी दर्जा देने का सुझाव सदन के माध्यम से दिया. 2.5 मिनट के अपने संबोधन में उन्होंने हेम्प क्या है लेकर राज्य के वित्त में इसे क़ानूनी करार करने से क्या असर पड़ेगा तक सब बताया.

“बाल विधायक” प्रियांशु भट्ट का सुझाव- 

अपनी बात रखते हुए प्रियांशु भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश राज्य हेम्प की खेती को क़ानूनी दर्जा दे चूका है. इससे इन राज्यों के कर में वृद्धि होगी साथ ही, हेम्प के पोधे से बनाये जाने वाले कपड़े के लघु उद्योग स्थापित होंगे, जिससे राज्य के लोगों को रोजगार मिलेगा. इसी तर्ज पर हिमाचल प्रदेश सरकार को भी हेम्प की खेती लागू करने पर विचार करना चाहिए.

इस दौरान उन्होंने 4 फायदे सरकार को गिनाये-
पहला- हेम्प पोधे की क़ानूनी रूप से खेती करने से गैर-क़ानूनी रूप से हो रही खेती पर नकेल कसेगी साथ ही राज्य को राजस्व को फायदा होगा.

दूसरा- खेती के क़ानूनी रूप से होने पर हेम्प की गैर-क़ानूनी रूप से खेती कर रहे किसानों को अपनी खेती का ज्यादा मूल्य मिलेगा साथ ही तस्करों पर रौक् लगेगी.

तीसरा- हेम्प के पौधे से कई प्रकार की दवाइयां एवं कपड़े भी बनाये जाते है जिससे राज्य में लघु उद्योगों का निर्माण संभव है.

चौथा- राज्य की कानून व्यवस्था पर इस गैर-क़ानूनी व्यापार के कारण पड़ रहे आर्थिक बोझ में भी कमी आयेगी.

डिजिटल बाल मेला की प्रिया शर्मा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश राज्य भारत में गैर क़ानूनी हेम्प की खेती एवं बेचने में आगे है. इससे राज्य के युवाओं में नशे की लत तो बढ़ ही रही है, साथ ही दूसरे राज्य के युवा भी इसकी ओर आकर्षित होते है. ऐसे में यह सुझाव इसके रोकथाम हेतु कारगर साबित हो सकता है.

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