नियम 324 के तहत जसवां परागपुर की छात्नेरा प्रदेश की सड़कों की दयनीय स्थिति के बारे में बताया
शिवाक्ष शर्मा.
शिमला. 12 जून को हिमाचल प्रदेश विधानसभा स्पीकर की अध्यक्षता में राज्य ऐतिहासिक बाल सत्र का साक्षी बना. इस विशेष सत्र के लिए देश भर से 68 बच्चों का चयन किया गया था, जिसकी प्रक्रिया कुल तीन माह चली थी. “बाल प्रतिनिधि” बाल मुद्दों पर अपनी आवाज़ शिमला स्थित विधानसभा भवन में मुखर करते नज़र आए. जसवां परागपुर की अक्षरा ठाकुर का चयन इस सत्र के लिए हुआ था, जिसमें उन्होने नियम 324 के तहत प्रदेश की सडकों की दयनीय हालात के बारे में बताया |
जल्द से जल्द इस समस्या का हल करने का सुझाव देते हुए अक्षरा ने कहा – “हमारे राज्य की सड़क व्यवस्था बहुत ही ख़राब है, जिसके चलते कुछ किलोमीटर जाने के लिए ही घंटो सफ़र करना पड़ता है. इसी के साथ सडकों का बुरी स्थति में होना राज्य की चिकित्सा, व्यापार, शिक्षा एवं विकास की दर भी कम कर रहा है. उन्होंने कहा कि हमारा राज्य पर्यटन पर पूर्ण रूप से आश्रित है ऐसे में अगर सड़कों को बहाल जल्द ही न किया गया तो राज्य को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे में सरकार रोड बहाल करने हेतु कोई नीति पर जल्द विचार करें.
बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर हुआ था विशेष बाल सत्र का अयोजन…
इस सत्र में मुख्य अतिथि के तौर पर राज्य के मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुक्खू एवं बतौर विशिष्ठ अतिथि राज्यसभा उप-सभापति श्री हरिवंश नारायण सिंह, शामिल हुए. इस सत्र की ख़ास बात यह रही की बच्चों ने ही मुख्यमंत्री, नेता-प्रतिपक्ष, स्पीकर समेत सभी पदों की भूमिका निभाई व एक दिन के लिए राज्य की विधानसभा का संचालन किया।
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