अपने इस आर्टिकल में बताया है नारियल का महत्व
बाल लेखक अनुष्का
डिजिटल बाल मेला द्वारा बच्चों की लेखन कला को बढ़ावा देने के लिए एक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है। इसके तहत बच्चों को सितंबर माह में आने वाले विशेष दिनों के ऊपर आर्टिकल लिखना है। डिजिटल बाल मेला की अनुष्का ने 2 सितंबर को आने वाले विश्व नारियल दिवस पर यह आर्टिकल लिखा है। इस आर्टिकल में अनुष्का ने नारियल का महत्व बताया है।
“प्यास में पानी, भूख में आहार, बीमारी में अमृत सा बन जाता है। पंडित जी को श्रीफल, पूजा भोग, हवन सामग्री समझ आता है। मां को तो सर का तेल, अम्मू को डोसे की चटनी नजर आता है। सबसे पहले तो मैं अनुष्का, डिजिटल बाल मेला के परिवार को नारियल दिवस की शुभकामनाएं और बधाई देती हूँ। नारियल दिवस क्या है, यह कब मनाया जाता है, और क्यों मनाया जाता है मैं अनुष्का आप सभी के बीच अपने विचार प्रकट कर रही हूं इस साल 2023 में सितंबर को शनिवार के दिन 15वाँ वर्ल्ड कोकोनट डे मनाया जा रहा है नारियल ऐसा फल है जिसका लगभग हर रूप उपयोगी होता है। नारियल दिवस हर साल 2 सितंबर को विश्व नारियल दिवस मनाया जाता है। नारियल को श्रीफल भी कहा जाता है, मंदिर में नारियल फोड़ना या चढ़ाने का रिवाज है नारियल को अंग्रेजी में कोकोनट भी कहा जाता है। नारियल का पेड़ एक बहुत ही सुंदर और उपयोगी पेड़ है। नारियल का पेड़ बहुत ऊंचा होता है यह समुद्र के पास रेतीली जमीन मैं उगता है। नारियल का पानी बहुत मीठा और स्वादिष्ट होता है नारियल का पेड़ सबसे उपयोगी पेड़ों में से एक है। यह पेड़ लंबा पेड़ है जिसकी कोई शाखा नहीं है इसका प्रत्येक भाग प्रयोग करने के योग्य है नारियल से बहुत सी चीजें बनाई जाती है। कई लोगों के लिए नारियल का पेड़ आजीविका का साधन है नारियल के पेड़ों से पारंपरिक घरों की चटाई, रस्सी और छत बनाई जाती है नारियल का पेड़ आमतौर पर तटीय क्षेत्र में पाया जाता है। नारियल का पेड़ बहुत उपयोगी होता है ।
कच्चे नारियल का पानी
पौष्टिकता से होता भरपूर
शुद्ध पेय ये देता है
सब थकान से हमको मुक्त।
नाम: अनुष्का राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला, किन्नू, जिला शिमला, हिमाचल प्रदेश
डिजिटल बाल मेला बच्चों द्वारा स्थापित एक प्लेटफॉर्म हैं जो बच्चों में जागरूकता लाने का और अपनी कला को दिखाने का एक मंच प्रदान करता है। डिजिटल बाल मेला सूचना प्रौद्योगिकी की शक्ति का उपयोग करके बच्चों को उनके रचनात्मक पक्ष को उजागर करने में मदद कर रहा है और इसे जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है।
आपको बता दें डिजिटल बाल मेला की शुरुआत 2020 में जयपुर की रहने वाली 10 साल की जान्हवी शर्मा ने की थी। डिजिटल बाल मेला अब तक कई अभियानों का आयोजन कर चुका है जिसमें “राजस्थान विधानसभा बाल सत्र”, “हिमाचल प्रदेश विधानसभा बाल सत्र”, “मैं भी बाल सरपंच” आदि शामिल है।
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