अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस की वास्तविक सार्थकता तभी हो सकती है,यदि संपूर्ण विश्व एक परिवार की तरह इसका हिस्सा बनकर अंतर्राष्ट्रीय शांति में योगदान देगा।
बाल लेखिका कशिश।
“बोया बीज बबूल का तो ,
फल कहां से पायेंगे ?
युद्ध भूमि में उतर गए तो ,
शांति कहां से लायेंगे ?
यह कहावत विश्व के वर्तमान परिदृश्य पर बिल्कुल सही बैठती है।वर्तमान समय में विश्व के कुछ देशों ने अमन, चैन,शांति को खो दिया है। अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस की वास्तविक सार्थकता तभी हो सकती है,यदि संपूर्ण विश्व एक परिवार की तरह इसका हिस्सा बनकर अंतर्राष्ट्रीय शांति में योगदान देगा।
संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अंतरराष्ट्रीय शांति की स्थापना करने और विश्व के देशों में अमन चैन की भावना स्थापित करने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 1981 में अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस मनाने की घोषणा की गई थी। जिसे 1982 में पूर्ण कर पहली बार अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस मनाया गया था। 1982 से 2002 तक अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस को सितंबर माह के तीसरे मंगलवार को मनाया जाता था। परंतु वर्ष 2002 में इसके लिए 21 सितंबर की तारीख निर्धारित की गई ।तभी से प्रत्येक वर्ष 21 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस मनाया जाता है।प्रत्येक वर्ष अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस का एक थीम होता है।इस वर्ष 41वा अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस मनाया जा रहा है और इस वर्ष का थीम : “शांति के लिए कार्यवाही ;#ग्लोबल गोल्स के लिए हमारी महत्वकांक्षा” है।
इस प्रकार प्रत्येक नागरिक ,प्रत्येक राज्य ,प्रत्येक देश द्वारा जब शांति हेतु योगदान किया जाएगा,शांति को प्रोत्साहित करने के लिए कार्यवाही की जाएगी असल में तभी अंतर्राष्ट्रीय शांति का महत्व होगा। व्यक्ति विशेष द्वारा शांति को अपने जीवन में धारण करने हेतु भगवत गीता में भी उपदेश दिया गया है —
“वह जो सभी इच्छाएं त्याग देता है और ‘मैं’और ‘मेरा’ की लालसा और भावना से मुक्त हो जाता है ,उसे शांति प्राप्त होती है।”
डिजिटल बाल मेला बच्चों के बीच जागरूकता पैदा करने और उनकी कला को प्रदर्शित करने के लिए बच्चों द्वारा स्थापित एक मंच है।
डिजिटल बाल मेला ने सितंबर माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को उनकी फोटो के साथ डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।
डिजिटल बाल मेला बच्चों के लिए अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता दिखाने का एक अभिनव मंच है। इसकी शुरुआत 2020 में जयपुर की 10 वर्षीय लड़की जान्हवी शर्मा ने की थी। डिजिटल बाल मेला ने अब तक कई अभियान चलाए हैं जिनमें “राजस्थान विधानसभा बाल सत्र”, “हिमाचल प्रदेश विधानसभा बाल सत्र”, “मैं भी” शामिल हैं। बाल सरपंच” आदि।
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