हनुमानगढ़ के पारस माली ने बताया नदियों धार्मिक एवं पौराणिक महत्व।

देशभर में बहने वाली नदियां अपने गौरव और सुंदरता का गीत गाती है।

बाल लेखक पारस माली। 

भारत नदियों की धरती है, सिंधु नदी से ही हमारी सभ्यता की शुरुआत हुई है। नदियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल सितंबर के चौथे रविवार को दुनिया भर में नदी दिवस मनाया जाता है। अक्सर हम देखते हैं लोग नदियों को साफ नहीं करते और उन्हें उस चीज का महत्व नहीं पता इस महत्व को ही समझने के लिए और नदियों के बारे में बताने के लिए नदी दिवस मनाया जाता है।

 इस साल अंतरराष्ट्रीय नदी दिवस 24 सितंबर को है, जिसका थीम है “नदियों का अधिकार” जो नदियों को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने की मांग करती है। विश्व भर में नदियों की रक्षा के लिए नदी दिवस मनाने की शुरुआत 2005 में की गई थी। अंतर्राष्ट्रीय नदी दिवस को भारत समेत दुनिया भर के कई देशों में मनाया जाता है। विश्व भर में अनेकों नदियां है और हर नदी की अपनी कहानी है। देशभर में बहने वाली नदियां अपने गौरव और सुंदरता का गीत गाती है।

भारत में नदी के महत्व की बात करें तो भारत को नदियों की धरती भी कहा जाता है। यहां छोटी बड़ी लगभग 200 मुख्य नदियां हैं। भारत में नदियों का विशेष धार्मिक महत्व भी है। नदियों को पवित्र,श्रेष्ठ और पूजनीय माना जाता गया है। साथ ही इसे देवी और मां का दर्जा प्राप्त है। हिंदू धर्म के अनुसार गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, सिंधु , गोदावरी, कृष्ण, महानदी, रवि आदि जैसी नदियों को श्रेष्ठ माना गया है।

 हिंदू धर्म में नदी का विशेष महत्व होता है। मान्यता है की नदी स्नान से व्यक्ति का मन शुद्ध होता है, अत्यमन शांत होता है और सारे पाप धुल जाते हैं। साथ ही नदी में स्नान करने से आपके जीवन के सभी कष्ट मानो दूर हो जाते हैं। अगर हम शास्त्रों के अनुसार देखें तो नदी में स्नान करते समय सात नदियों (गंगा, यमुना, गोदावरी, नर्मदा, कृष्ण, कावेरी और सिंधु) का ध्यान करने का विधान है। वेद पुराण और धर्म शास्त्रों में गंगा नदी को श्रेष्ठ और कई नदियों को पवित्र बताया गया है।

भारत की महत्वपूर्ण नदियां।

हिमालय की पहाड़ियों से बहने वाली सिंधु नदी से ही हमारी सभ्यता का शुरुआत हुई है। ऐसे में इस नदी का एक खास ऐतिहासिक मूल्य भी है, जिससे सबसे बड़ी मानव सभ्यता, सिंधु घाटी सभ्यता का जन्म हुआ। सिंधु नदीं से जहां भारत के ऐतिहासिक मूल्य जुड़े हैं, वहीं गंगा भारत की सबसे लोकप्रिय और पौराणिक नदी मानी जाती है। साथ ही यह हिंदुओं के लिए सबसे पवित्र नदी है, जिसे देवी के रूप में पूजा जाता है। गंगा नदी हिमालय के गंगोत्री से निकलती है। पूरे विश्व में ऐसी कोई नदी नहीं है, जिसे गंगा के समान महत्व और श्रेय प्राप्त हो।

सिंधु और गंगा के साथ ही गोदावरी (Godavari River) भी भारत की प्रमुख नदी है। यह गंगा के बाद दूसरी सबसे बड़ी नदी है। गोदावरी नदी को भी हिंदू धर्मग्रंथों में पूजनीय नदी माना गया है और कई सदियों से इसने समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को बरकरार रखा है।

डिजिटल बाल मेला बच्चों के बीच जागरूकता पैदा करने और उनकी कला को प्रदर्शित करने के लिए बच्चों द्वारा स्थापित एक मंच है।

डिजिटल बाल मेला ने सितंबर माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को उनकी फोटो के साथ डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।

  डिजिटल बाल मेला बच्चों के लिए अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता दिखाने का एक अभिनव मंच है। इसकी शुरुआत 2020 में जयपुर की 10 वर्षीय लड़की जान्हवी शर्मा ने की थी। डिजिटल बाल मेला ने अब तक कई अभियान चलाए हैं जिनमें “राजस्थान विधानसभा बाल सत्र”, “हिमाचल प्रदेश विधानसभा बाल सत्र”, “मैं भी” शामिल हैं। बाल सरपंच” आदि।

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