बिहार के सैयद फरहान हैदर ने विश्व पर्यटन दिवस के बारे में दी जानकारी। 

पर्यटन हमारी संस्कृति और संस्कारों को विकसित करने का सशक्त माध्यम बन सकता है। 

बाल लेखक सैयद फरहान हैदर। 

पर्यटन आज के इस दौड़भाग के जिंदगी में एक अहम भूमिका निभाता है और हमे कुछ दिनों के लिए चिंता रहित कर देता है एवं फुरसत के क्षणों का आनंद दिलाता है तथा देश व दुनिया के आर्थिक और सांस्कृतिक, सामाजिक विकास को भी बढ़ावा देता है। पर्यटन की महत्वता को देखते हुए हर साल 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस मनाया जाता है। विश्व पर्यटन दिवस पहली बार 1980 में संयुक्त राष्ट्र विश्व व्यापार संगठन (UNWTO) द्वारा शुरू किया गया था ,ताकि देशों को पर्यटन के लिहाज से एक दूसरे से जोड़ा जा सके। विश्व पर्यटन संगठन (UNWTO), मैड्रिड, स्पेन में स्थित संयुक्त राष्ट्र की एक संस्था है। यह विश्व में पर्यटन संबंधी देखरेख करती है। पर्यटन के तीन मुख्य उद्देश्य हैं: आर्थिक विकास को बढ़ावा देना, सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना और सतत विकास का समर्थन करना। इस वर्ष के राष्ट्रीय पर्यटन दिवस की थीम “ग्रामीण और समुदाय केंद्रित” पर्यटन है। पर्यटन पर्यटकों को वस्तुओं एवं सेवाओं जैसे आवास, परिवहन एवं विरासत के प्रति आकर्षण की बिक्री के माध्यम से राजस्व उत्पन्न करता है।

27 सितंबर, 2023 को आयोजित होने वाले विश्व पर्यटन दिवस समारोह का विषय ‘ पर्यटन और हरित निवेश ‘ है। भारत सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था के लिए पर्यटन के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 25 जनवरी को राष्ट्रीय पर्यटन दिवस के रूप में स्थापित किया। इसे मनाने की शुरुआत आजादी के बाद वर्ष 1948 में हुई थी। पर्यटन हमारी संस्कृति और संस्कारों को विकसित करने का सशक्त माध्यम बन सकता है। संस्कृति का संवाहक, संचारक और संप्रेषक है पर्यटन। पर्यटन के माध्यम से हम दूसरे देशों के परंपरा तथा दुनिया हमरी संस्कृति जान सकती हैं, इंसान एक सामाजिक प्राणी है, और हमरी जिज्ञासा असीम है इस कारण से ही हम पर्यटन में इतने आगे बढ़ रहे है। तभी तो पर्यटन के शुरुआत आज से तीसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व मेंमेसोपोटामिया में सुमेरियों ने सिंधु घाटी की हड़प्पा सभ्यता के साथ व्यापार के समय से हुई थी। पर्यटन धरती के कोने कोने को एक साथ जोड़ती है और अलग अलग जगह की अर्थव्यवस्था, उद्योग ,रहन सहन,पर्यावरण , इतिहास और रहस्यमय चीज़ों के बारे में जानने में मदद करती है। पर्यटन क्षेत्र एवं संबंधित उद्योगों में रोज़गार के अवसर पैदा कर सकता है। वहीं इसमें कई वर्ग में पर्यटन की संभावनों को तलाशने तथा पर्यटन स्थलों पर बेहतर सुविधाओं पर जोर दिया गया है। जी-20 सम्मेलन की बैठकों में पर्यटन भी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र माना गया हैसाल 2022 में विश्व पर्यटन दिवस का मेजबान देश इंडोनेशिया था। इस बार सऊदी अरब विश्व पर्यटन दिवस 2023 की मेजबानी कर रहा है।विश्व आर्थिक मंच का यात्रा और पर्यटन विकास सूचकांक 2021 में इसकी पिछली यात्रा और पर्यटन प्रतिस्पर्धात्मकता रिपोर्ट के अनुसार भारत को कुल मिलाकर 117 देशों में से 54वें स्थान पर रखता है। विश्व यात्रा और पर्यटन परिषद की वर्ष 2021 की रिपोर्ट में विश्व सकल घरेलू उत्पाद में योगदान के मामले में भारत के पर्यटन को 10वें स्थान पर रखा गया है। भारत दक्षिण कोरिया, मिस्र और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों को पछाड़कर दुनिया का 22वां सबसे अधिक दौरा किया जाने वाला देश बन गया। 2022 में भारत आए 61.9 लाख विदेशी पर्यटक, पिछले वर्ष की तुलना में हुई 4 गुना वृद्धिसंयुक्त राष्ट्र के वर्ल्ड टूरिज्म ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक, दुनिया में सबसे ज्यादा लोग घूमने के लिए फ्रांस पहुंचते हैं. फ्रांस में हर साल 8.9 करोड़ पर्यटक पहुंचते हैं। पर्यटन का क्षेत्र इतना विशाल है कि केवल इस क्षेत्र में से देश के 9.3 प्रतिशत रोजगार के अवसर आते हैं। भारत में घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘देखो अपना देश’, ‘स्वदेश दर्शन योजना’ और वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम जैसी पहल की शुरूआत कर रहा है।

डिजिटल बाल मेला बच्चों के बीच जागरूकता पैदा करने और उनकी कला को प्रदर्शित करने के लिए बच्चों द्वारा स्थापित एक मंच है।

डिजिटल बाल मेला ने सितंबर माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को उनकी फोटो के साथ डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।

डिजिटल बाल मेला बच्चों के लिए अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता दिखाने का एक अभिनव मंच है। इसकी शुरुआत 2020 में जयपुर की 10 वर्षीय लड़की जान्हवी शर्मा ने की थी। डिजिटल बाल मेला ने अब तक कई अभियान चलाए हैं जिनमें “राजस्थान विधानसभा बाल सत्र”, “हिमाचल प्रदेश विधानसभा बाल सत्र”, “मैं भी” शामिल हैं। बाल सरपंच” आदि।

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