27 सितंबर का ही दिन विश्व पर्यटन दिवस के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि इसी दिन 1970 में संयुक्त राष्ट्र विश्व व्यापार संगठन को मान्यता मिली थी।
बाल लेखक पारस माली।
विश्व पर्यटन दिवस कब, क्यों व कैसें मनाया जाता है? जानिए इसका इतिहास, महत्व.
घूमने का शौक रखने वाले लोग मौका मिलते ही घूमने के लिए निकल पड़ते हैं. दुनिया भर में लोगों का यह शौक ज़िंदा रहे इसके लिए हर साल 27 सिंतबर को विश्व पर्यटन दिवस मनाया जाता है.विश्व पर्यटन दिवस न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टूरिज्म को बढ़ाने में मदद करता है, बल्कि अलग-अलगे देशों को पर्यटन के जरिए एक साथ जोड़कर रखने में अहम भूमिका निभाता है. लेकिन क्या आपको पता है कि विश्व पर्यटन दिवस की शुरूआत कब और कैसे हुई. क्या है इसके पीछे का इतिहास?
विश्व पर्यटन दिवस 2023 के मौके पर हम इस साल की थीम के बारे में भी जानेंगे। विश्व पर्यटन दिवस की शुभकामनाओंं के साथ आइए शुरू करते हैं। कब और कैसे हुई विश्व पर्यटन दिवस मनाने की शुरुआत?
हर साल की तरह इस साल भी 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस मनाया जा रहा है. इसकी शुरूआत कब और कैसे हुई? इस सवाल के जवाब के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा.वो साल 1980 था, जब इसे पहली बार सेलिब्रेट किया गया था. संयुक्त राष्ट्र विश्व व्यापार संगठन (UNWTO) ने इसे शुरू किया था। 27 सितंबर का ही दिन विश्व पर्यटन दिवस के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि इसी दिन 1970 में संयुक्त राष्ट्र विश्व व्यापार संगठन को मान्यता मिली थी।
इस साल विश्व पर्यटन दिवस 2023 की मेजबानी सऊदी अरब कर रहा है। पिछले साल 2022 में इसकी मेजबानी इंडोनेशिया ने की थी। इस साल विश्व पर्यटन दिवस की थीम ”Tourism And Green Investments” है, मतलब ‘पर्यटन और हरित निवेश’। दरअसल कोरोना काल में दनिया भर के पर्यटन को भारी नुकसान हुआ था, इसके कारण कई देश जिनकी अर्थव्यवस्था पर्यटन पर ही निर्भर करती है, उनको बड़ा नुकसान हुआ था। ‘पर्यटन और हरित निवेश’ के जरिए ऐसे देशों की मदद करने का उद्देश्य है।
-पर्यटन के प्रति जागरूकता को बढ़ाना। -सांस्कृतिक-प्राकृतिक विरासत का संरक्षण।
-लुप्तप्राय प्रजातियों की सुरक्षा में मदद।
-रोज़गार के अवसर प्रदान करने के लिए काम। -लोगों को पर्यटन के लिये प्रेरित करना।
डिजिटल बाल मेला बच्चों के बीच जागरूकता पैदा करने और उनकी कला को प्रदर्शित करने के लिए बच्चों द्वारा स्थापित एक मंच है।
डिजिटल बाल मेला ने सितंबर माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को उनकी फोटो के साथ डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।
डिजिटल बाल मेला बच्चों के लिए अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता दिखाने का एक अभिनव मंच है। इसकी शुरुआत 2020 में जयपुर की 10 वर्षीय जान्हवी शर्मा ने की थी। डिजिटल बाल मेला ने अब तक कई अभियान चलाए हैं जिनमें “राजस्थान विधानसभा बाल सत्र”, “हिमाचल प्रदेश विधानसभा बाल सत्र”, “मैं भी” शामिल हैं। बाल सरपंच” आदि।
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