सिरमौर की कशिश ने राष्ट्रीय एकजुटता दिवस की दी जानकारी…

हम केवल उतने ही मजबूत है,जितना की हम एकजुट हैं। जितना हम विभाजित है, उतना ही कमजोर है।।

बाल लेखिका कशिश।

भारत के लोगों को एक बार और जरूरत थी अपनी एकजुटता से दुश्मनों का सामना करने की और अपनी एकता का पराक्रम दिखाने की।1947 में प्राप्त स्वतंत्रता भी इसी एकता और संगठन का फल थी पर अभी भारत ने शांति से अपनी स्वतंत्रता का जश्न भी नही मनाया था, कि हिमालय के उस ओर षडयंत्र रचा जा रहा था,भारत की स्वतंत्रता और शांति में विघ्न डालने का।

जी हां ये बात है सन 1962 के उस भ्याव्यह युद्ध की जब भारत को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। चीन ने भारत पर सीमा संबंधी विवाद को लेकर आक्रमण किया था ।

यह युद्ध 20,अक्टूबर 1962 से 20,नवंबर 1962 तक पूरे एक महीने तक चला था।इस युद्ध में भयंकर रक्तपात हुआ था।भारत के करीब 10,000 सैनिकों ने इस युद्ध में अपना लोहा मनवाया,जिसमे से भारत के करीब 1,383 सैनिक शहीद हुए थे और 1,047 सैनिक घायल हुए थे। वही भारतीय वीर जवानों ने चीन के 722 सैनिक मार गिराए और 1,657 सैनिक घायल हुए। हालांकि इस युद्ध में भारत की हार हुई थी ,क्योंकि भारत के पास सीमित हथियार उपलब्ध थे।

सन 1966 में प्रधानमंत्री श्रीमति इंदिरा गांधी वाली एक समिति ने 20 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकजुटता दिवस के रूप में समर्पित करने का निर्णय लिया। तभी से प्रत्येक वर्ष भारत में 20 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकजुटता दिवस के रूप में मनाया जाता है।

भारत की यह एकजुटता स्वतंत्रता से पूर्व भी चली आ रही है और स्वतंत्रता के बाद भी इसी एकजुटता ने भारत को सम्पूर्ण विश्व में अग्रिम श्रेणी में रखा है।और भारतीय नागरिक होने के नाते हम भारतीयों का कर्तव्य यह बनता है की हम राष्ट्रीय एकजुटता को बनाए रखें,

तभी असल रूप में हमारे शहीद वीर जवानों को शांति प्राप्त होगी।

  “एकजुटता इस सिद्धांत पर आधारित है

    की हम एक दूसरे की रक्षा के लिए

    खुद को जोखिम में डालने के लिए तैयार है।।”

डिजिटल बाल मेला बच्चों के बीच जागरूकता पैदा करने और उनकी कला को प्रदर्शित करने के लिए बच्चों द्वारा स्थापित एक मंच है।

डिजिटल बाल मेला ने सितंबर एवं अक्तूबर माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को उनकी फोटो के साथ डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।

डिजिटल बाल मेला बच्चों के लिए अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता दिखाने का एक अभिनव मंच है। इसकी शुरुआत 2020 में जयपुर की 10 वर्षीय लड़की जान्हवी शर्मा ने की थी। डिजिटल बाल मेला ने अब तक कई अभियान चलाए हैं जिनमें “राजस्थान विधानसभा बाल सत्र”, “हिमाचल प्रदेश विधानसभा बाल सत्र”, “मैं भी” शामिल हैं। बाल सरपंच” आदि।

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