बच्चे जानें क्यों ज़रुरी है लैंगिक संवेदनशीलता …

यूनिसेफ की राजस्थान प्रमुख इज़ाबेल बार्डेम ने बताया जयपुर में आयोजित मीडिया कार्यशाला में

फ्यूचर सोसायटी द्वारा आयोजित अभियान इक्वली सेंसीटिव राजस्थान के तहत जयपुर के इंदिरा गांधी पंचायत भवन में आयोजित एक दिवस की मीडिया कार्यशाला में जयपुर के वरिष्ठ पत्रकार शामिल हुए। 2 नवंबर को हुई इस वर्कशाप में यूनिसेफ की राजस्थान प्रमुख मुख्य अतिथी के रुप में शामिल हुयी।

इज़ाबेल बार्डेम ने इस अवसर पर कहा कि सबसे पहले इस बात को समझने की ज़रुरत है कि जेंडर विषय सामाजिक है। महिला पुरुष का भेद करने वाले लोग इस फर्क को नहीं समझ पाते हैं। ऐसे में मीडिया की ज़िम्मेदारी बढ़ जाती है कि वो समाज को संवेदनशील बनाने में अपनी भूमिका बढ़ाये।

समाज में लैंगिक असमानता मिटाने के लिये टी वी चैनल, अखबार और न्यू मीडिया ऐसी खबरों को प्रमुखता प्रदान करे जिसमें महिलाओं की क्षमता प्रदर्शित हो। महिलाओं के लेकर समाज आज भी स्टीरियो टाइप एप्रोच रखता है । यही कारण है कि चाहे राजनीति हो या कोरपोरेट महिलाओं की स्थिति सब जगह पिछड़ी हुयी है।

मीडिया की अहमियत का ज़िक्र करते हुये बार्डेम ने कहा कि यूनिसेफ समय समय पर मीडिया के साथ काम करता रहा है और आगे भी जारी रखेगा। गौरतलब है कि इस अवसर पर बीबीसी के पूर्व में भारत संपादक रहे संजीव श्रीवास्तव, आल इंडिया रेडियो की प्रोग्रामिंग हैड रेशमा खान, राधारमण शर्मा, कंट्री इन के एडिटर दिनेश गौतम, इंडिया न्यूज़ के ब्यूरो चीफ अरविंद पालावत, राजस्थान पत्रिका की पूर्व सह संपादक रही अंकिता शर्मा, भास्कर टीवी और ए वन न्यूज़ से पूर्व में जुड़ी रही और वर्तमान में कहानियां ज़िदगी यूट्यूब कार्यक्रम की एंकर राखी जैन सहित बड़ी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे।

 

 

 

बता दें इस सत्र के आख़िरी में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए द फ्यूचर सोसाइटी के अध्यक्ष सुशील कुमार शर्मा ने मौजूद सभी पत्रकारों की ज़िम्मेदारी बताते हुए कहा कि “महिला मुद्दों पर हर पत्रकार को अपनी क़लम पैनी करनी होगी, तभी जाकर महिलाओं की समाज में समानता एवं सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी”। आपकी जानकारी के लिए बता दें फ़्यूचर सोसाइटी द्वारा आयोजित इस अभियान के तहत अगले 5 माह तक पत्रकारों के साथ ही बच्चों, शिक्षकों एवं अभिभावकों को “लैंगिक संवेदनशील” बनाने का कार्य किया जाएगा।

 

गौरतलब है कि फ्यूचर सोसायटी द्वारा आयोजित और यूनिसेफ द्वारा प्रायोजित इस कार्यशाला का मकसद इक्वली सेंसिटिव समाज का निर्माण करने में मीडिया की भागीदारी पुख्ता करना था।

 

डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।

 

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