राजस्थान के पारस माली ने दी क्रिसमस डे की जानकारी…

बाल लेखक पारस माली।

क्रिसमस डे प्रतिवर्ष 25 दिसंबर मनाया जाता है। क्रिसमस ईसा मसीह के जन्म के साथ जुड़ा हुआ त्यौहार है। ईसाई धर्म के अनुसार 25 दिसंबर को प्रभु यीशु का जन्म हुआ था इसलिए क्रिसमस डे मनाया जाता है। वैसे तो क्रिसमस ईसाई धर्म का त्यौहार है लेकिन सभी धर्म और संस्कृत के लोग इस उत्साह की साथ बनती है। अगर बात करें हम भारत की तो भारत में भी बड़ी धूमधाम से यह त्यौहार मनाया जाता है और बच्चे खासकर इस त्यौहार का वेट करते हैं की कब यह त्यौहार आएगा कब उन्हें गिफ्ट मिलेगा।

क्रिसमस का इतिहास।

क्रिसमस का इतिहास ईसा मसीह के जन्म के साथ जुड़ा हुआ है, जो बाइबल की न्यू टेस्टामेंट में लिखा है । ईसाई धर्म के अनुसार 25 दिसंबर को प्रभु यीशु मसीह है का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन को क्रिसमस डे के रूप में मनाया जाने लगा। प्रभु के पुत्र यीशु को जन्म देने की भविष्यवाणी की गई थी इसी मान्यता को देखते हुए 25 दिसंबर को क्रिसमस डे मनाया जाने लगा।

डिजिटल बाल मेला ने दिसंबर माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।

डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।

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