बाल लेखिका अंजली।
सभी को मेरा नमस्कार ।
मेरा आज का विषय हिंदी दिवस पर है ।
मुझे आशा है कि आपको मेरा यह विषय जरूर पसंद आएगा।
मैं आपको सबसे पहले हिंदी भाषा पर कुछ पंक्तियां कहना चाहूंगी ।
जिसमें है मैंने सपने बुने
जिससे जुड़ी है मेरी आशा
जिससे है मुझे पहचान मिली
वह है मेरी अपनी हिंदी भाषा।
विश्व में हिंदी दिवस पहली बार 10 जनवरी 2006 को मनाया जाता गया है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी 2006 को प्रतिवर्ष विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाने की घोषणा की थी।
उसके बाद से भारतीय विदेश मंत्रालय ने विदेश में 10 जनवरी 2006 को पहली बार विश्व हिंदी दिवस मनाया था। जब पहली बार 1949 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी भाषा बोली गई थी वैश्विक स्तर पर हिंदी भाषा को बढ़ावा देना और दुनिया भर में पहले हिंदी जानकारी को एक सूत्र में बंधे या एकजुट किया जाता है ।
हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस की एक थीम के साथ मनाया जाता है इस साल 2023 में विश्व हिंदी दिवस की थीम है “हिंदी को जनमत की भाषा बनाना बगैर उनकी मातृभाषा की महत्व को भूलें।”
हिंदुस्तान की है शान हिंदी हर हिंदुस्तानी की है
पहचान हिंदी एकता की अनुपम परंपरा है
हिंदी हर दिल का अरमान है ।
विश्व हिंदी दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।
धन्यवाद
जय हिंद। जय भारत।
डिजिटल बाल मेला ने जनवरी माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।
डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।
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