हिमाचल प्रदेश की जेसिका ने लोहड़ी महोत्सव का बताया महत्त्व।

बाल लेखिका जेसिका।

पंजाब में लोग सर्दियों के मौसम का अंतिम पड़ाव पर आना स्वागत करने की खुशी में लोहड़ी का त्यौहार मनाते हैं। यह त्यौहार नई शुरुआत को दर्शाता है। लोहड़ी का त्यौहार अलाव के साथ मनाया जाता है। परंपरागत रूप से इसकी तैयारी लगभग एक या दो सप्ताह पहले से शुरू हो जाती है जहां लड़के और लड़कियां अलाव के लिए उपले बनाने के लिए गाय का गोबर इकट्ठा करना शुरू कर देते हैं, लोहड़ी वाले दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं और अलाव जलाने के आलावा लोहड़ी के दिन, स्वादिष्ट भोजन पकाया जाता है जिसमें मुख्य रूप लोहड़ी विशेष भोजन ‘सरसों का साग‘ और ‘मक्की की रोटी, आटे के लड्डू के साथ–साथ कई अन्य व्यंजन बनाए और खिलाए जाते हैं। यह त्यौहार उन लोगों के लिए बहुत अहमियत रखता है जो नवविवाहित हों या घर परिवार में जिस बच्चे की यह पहली लोहड़ी होती है। इस दिन लोग अपने परिवार को खाने के लिए आमंत्रित करते हैं और एक दूसरे को उपहार देते हैं। अंत में खुश रहो आप हमेशा, इतनी दुआ लाया हूँ! नाम है मेरा सन्देश, आपको हैप्पी लोहड़ी विश करने आया हूँ! लोहड़ी की हार्दिक शुभकामनायें।

डिजिटल बाल मेला ने जनवरी माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।

डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।

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