हिमाचल प्रदेश के प्रियांशु ने दी मकर संक्रांति पर्व की जानकारी…

बाल लेखक प्रियांशु।

प्रस्तावना: मकर संक्रांति एक फसल का त्यौहार है जो भारत में बड़ी उत्साह और खुशी के साथ मनाया जाता है। यह आमतौर पर 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है और दिन की लंबाई की शुरुआत का संकेत देता है भारत के विभिन्न हिस्सों में यह त्योहार पोंगल ,उत्तरायण, मगही, लोहड़ी और खिचड़ी भी जाना जाता है।

कैसे मनाया जाता है मकर संक्रांति का त्यौहार: इस देना सुबह जल्दी उठकर स्नान किया जाता है इसके अलावा तिल और गुड़ के लड्डू एवं अन्य व्यंजन भी बनाए जाते हैं इस समय सुहागन महिलाएं सुहाग की सामग्री का आदान-प्रदान भी करती हैं ऐसा माना जाता है कि इससे उनके पति की आयु लंबी होती हैंl

महाभारत के अनुसार: महाभारत में भीष्म पितामह ने सूर्य के उत्तरायण होने पर ही माघ शुक्ल अष्टमी के दिन स्वेच्छा से शरीर का परित्याग किया था उनका श्रआद्ध संस्कार भी सूर्य की उत्तरायण गति में हुआ था फलत: आज तक पितरों की प्रसन्नता के लिए तिल एवं जल अर्पण की प्रथा मकर संक्रांति के अवसर पर प्रचलित है।

उपसंहार: इन सभी मान्यताओं के अलावा मकर संक्रांति पर्व के साथ एक उत्साह और भी जुड़ा है इस दिन पतंग उड़ाने का भी विशेष महत्व होता है इस दिन कई स्थानों पर पतंग बाजी के बड़े-बड़े आयोजन भी किए जाते हैं लोग बेहद आनंद और उल्लास के साथ पतंग बाजी करते हैं आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी मे कई जगहों पर इसका महत्व कम होता जा रहा है पतंग बाजी के समय मांझे की डोर से आकाश में उड़ रहे पक्षियों की मौत हो जाती है यह ध्यान देने योग्य बात है तथा घरों पर पतंग उड़ाते समय हमें खुद का और सभी का ध्यान रखना चाहिए ताकि हर परेशानी से बचा जा सके।

डिजिटल बाल मेला ने जनवरी माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।

डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।

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