आज सुबह 11 बजे से होगा शुरू।
शिवाक्ष शर्मा
जयपुर: जयपुर के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय घाटी करोलां में आज सुबह 11 बजे मेडिटेशन सत्र का आयोजन किया जाएगा। डिजिटल बाल मेला द्वारा ये सत्र का आयोजन किया जा रहा है जिसमें श्रीमती रजनी भार्गव जो कि एक प्रसिद्ध आध्यात्मिक सलाहकार और रैकी ग्रैंडमास्टर हैं उनके द्वारा बच्चों को मेडिटेशन करने के तरीके सिखाये जाएंगे।
इसी दौरान रजनी भार्गव जी बच्चों से संवाद भी करेंगी। इस से पहले ऐसा ही आयोजन 24 जनवरी को राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय हरनाथपुरा में किया गया था जिसमें 150 बच्चों ने भाग लिया था एवं मेडिटेशन के लाभ जाने थे।
आज कल के तनावपूर्ण माहौल का असर केवल बड़ों पर ही नहीं पड़ता बल्कि बच्चे भी तनाव का शिकार बन रहे हैं। जिस तरह से दिन प्रतिदिन बच्चों में आत्महत्या के मामले बढ़ रहे हैं इनसे हम सब वाकिफ़ हैं। बच्चों में बढ़ रहीं आत्महत्याओं की घटना के लिए कई कारण मौजूद हैं जैसे की बढ़ता कॉम्पटीशन, नशे की लत, माता पिता की उम्मीदों पर खरा ना उतरना या फिर कोई अन्य घरेलु या बाहरी समस्या का होना। ये सब कारण डिप्रेशन को बढ़ावा देते हैं जिस से नकारत्मक विचार आते हैं। मेडिटेशन से न सिर्फ ध्यान आपके काम पर अधिक लगता है बल्कि आपकी कार्यक्षमता भी बढ़ जाती है। जो बच्चे बहुत अधिक चंचल होते हैं उन्हें खासतौर पर मेडिटेशन करना चाहिए।
डिजिटल बाल मेला द्वारा इससे पूर्व भी मेडिटेशन सत्रों का आयोजन किया जा चुका है जहां बच्चों ने ऑनलाइन जुड़कर मेडिटेशन किया था। डिजिटल बाल मेला मेडिटेशन सत्रों की इस श्रंखला को आगे भी जारी रखेगा। इस मेडिटेशन सत्र की और जानकारी के लिए आप डिजिटल मेला से ऑनलाइन या फोन के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं।
डिजिटल बाल मेला ने फरवरी माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।
डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।

