जानिए वर्ल्ड किडनी डे के बारे में हिमाचल प्रदेश की कशिश से…

जानिए वर्ल्ड किडनी डे के बारे में हिमाचल प्रदेश की कशिश से।

बाल लेखिका कशिश।

मानव शरीर को ठीक से काम करने के लिए किडनी की आवश्यकता होती है और स्वस्थ किडनी के बिना सबसे आसान काम भी सबसे मुश्किल बन जाता है ।
इसी कारण किडनी हेल्थ के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए “विश्व गुर्दा दिवस” अर्थात ‘वर्ल्ड किडनी डे’ मनाया जाता है , जिसका उद्देश्य किडनी स्वास्थ्य के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना और इसके वैश्विक प्रसार को कम करना है । स्वास्थ्य बेहतर और जीवन खुशहाल तभी होगा, जब शरीर का प्रत्येक अंग बेहतर ढंग से काम करेगा। रक्त की सफाई और शरीर से अपशिष्ट पदार्थ को बाहर निकलने में गुर्दे की केंद्रीय भूमिका होती है ।
मानव शरीर में फिल्टर का काम करने वाली किडनी के प्रति जागरूकता को बढ़ाने के मकसद से साल 2006 में ‘वर्ल्ड किडनी डे’ मनाने की शुरुआत की गई थी । वर्ल्ड किडनी डे प्रत्येक वर्ष मार्च के दूसरे गुरुवार को मनाया जाता है ।इस वर्ष 14 मार्च,2024 को “विश्व किडनी दिवस” मनाया जाएगा ।
“विश्व किडनी दिवस” 2024 की थीम:— “सभी के लिए किडनी स्वास्थ्य : देखभाल और इष्टतम दवा अभ्यास तक समान पहुंच को बढ़ावा देना” है।

‘इंटरनेशनल सोसायटी आफ नेफ्रोलॉजी’ (ISN) और ‘इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ़ किडनी फाऊंडेशंस’ (IFKF) ने ‘विश्व किडनी दिवस’ मनाने के लिए सहयोग किया था। इस दिन पर किडनी से जुड़े रोगों से बचने के लिए कार्यक्रमों और आयोजनों के माध्यम से जागरूक किया जाता है। शैक्षणिक संस्थानों में अनेक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। भारत में CKD यानी क्रॉनिक किडनी डिजीज का अनुमानित प्रसार प्रति 10 लाख लोगों में 800 है। किडनी रोगों की रजिस्ट्री भारत में पहली बार ‘इंडियन सोसायटी आफ नेफ्रोलॉजी’ द्वारा प्रकाशित की गई थी।

हमारी समग्र स्वास्थ्य में अद्भुत अंग ‘किडनी’ के महत्व को प्रसारित करने और दुनिया भर में किडनी रोग की आवृत्ति को कम करने में इस दिवस का विशेष महत्व है!

डिजिटल बाल मेला ने मार्च माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।

डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।

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