डिजिटल बाल मेला की तरफ से आप सभी को धुलंडी यानी रंगों वाली होली की हार्दिक शुभकामनाएं…

डिजिटल बाल मेला की तरफ से आप सभी को धुलंडी यानी रंगों वाली होली की हार्दिक शुभकामनाएं।

जानिए धुलंडी महोत्सव के बारे में।

शिवाक्ष शर्मा।

धुलंडी त्यौहार आमतौर पर हिंदू कैलेंडर के अनुसार होलिका दहन के दूसरे दिन मनाया जाता है। बहुत जोश और उत्साह के साथ मनाया जाने वाला यह त्यौहार न केवल राजस्थान में लोकप्रिय है, बल्कि भारत के उत्तरी भाग में भी उतनी ही लोकप्रिय है। रंगों के साथ होली खेलने को ही धुलंडी कहा जाता है, इस साल ये त्योहार 25 मार्च को मनाया जाएगा। हिंदू समुदाय के बीच धुलंडी का बहुत महत्व है। इस दिन, परिवार और समुदाय शुभकामनाओं का आदान-प्रदान करने, पारंपरिक मिठाइयाँ और स्नैक्स साझा करने और विशेष उत्सव के व्यंजनों का आनंद लेने के लिए एक साथ आते हैं। ‘धुलंडी’ शब्द ‘धूल’ शब्द से बना है, जिसका अर्थ है धूल या पाउडर। इस त्योहार के दौरान, लोग रंगीन पाउडर और पानी से खेलते हैं, जो बुराई पर अच्छाई की जीत और वसंत के आगमन का प्रतीक है। सरकारी कर्मचारी जैसे की पुलिस कर्मियों को इस दिन अवकाश नहीं होता है इसलिए वे इस महोत्सव को अगले दिन मनाते हैं।
इस दिन रंग खेलने, गले मिलने के साथ ही भांग या ठंडाई का सेवन किया जाता है। साथ ही इस दिन भजिये या पकोड़े खाने का प्रचलन है। शाम को स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद गिल्की के पकोड़े का मजा लिया जाता है। पकवान में पूरणपोली, दही बड़ा, गुजिया, रबड़ी खीर, बेसन की सेंव, आलू पुरी आदि व्यंजन बनाए जाते हैं।
डिजिटल बाल मेला की तरफ से आप सभी को होली महोत्सव की हार्दिक बधाई। हम आशा करते हैं की आप खूब धूमधाम एवं सतर्कता से इस महोत्सव का आनंद उठाएं।

डिजिटल बाल मेला ने मार्च माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।

डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।

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