आइए जानते हैं हनुमानगढ़ के संकेत छाबड़ा से हनुमानगढ़ के ऐतिहासिक भद्रकाली मंदिर के बारे में…

आइए जानते हैं हनुमानगढ़ के संकेत छाबड़ा से हनुमानगढ़ के ऐतिहासिक भद्रकाली मंदिर के बारे में।

 

सुप्रभात मैं संकेत छाबड़ा आठवीं कक्षा का विद्यार्थी आज आपको हनुमानगढ़ के ऐतिहासिक भद्रकाली मंदिर के बारे में बताने जा रहा हूं I कहां जाता है कि यह मंदिर 500 साल पुराना है और यह भी सुनने में आया है कि 500 साल पहले मुगल बादशाह अकबर यहां से अपनी सेना के साथ गुजर रहे थे तो उनको उस समय बहुत भूख प्यास लग रही थी तो उस समय मां भद्रकाली ने दर्शन दिए और अपने चमत्कार से उनकी भूख और प्यास को मिटाया इस चमत्कार को देखते हुए मुगल बादशाह अकबर ने यहां पर मां भद्रकाली मंदिर की स्थापना करवाई I यह मंदिर एक गुंबद के रूप में बना हुआ है I यहां पर नवरात्रों में बहुत भारी मेला लगता है I बाहर से भी बहुत सारी श्रद्धालु आते हैं I कहां जाता है कि यहां पर जो भी इच्छा मांगी जाती है वह पूरी हो जाती है और पूरे होते ही यहां पर लोग बकरा और शराब का प्रसाद चढ़ाते हैं I नवरात्रों में बहुत भारी मेला लगता है I दुकानें सजती है ,झूले लगते हैं, दूर-दूर से लोग दर्शन करने के लिए आते हैं I मंदिर के अंदर जो आगे वाली मूर्ति है , वह लाल पत्थर की बनी हुई है और यह बीकानेर के राजा गंगा सिंह ने बनवाई थी और पीछे वाली मूर्ति मुगल बादशाह अकबर ने स्थापित करवाई थी I मंदिर के बाहर भैरव बाबा का मंदिर भी है और साथ में बाबा गोरखनाथ जी का भी मंदिर है जो की शिव जी के पुजारी थे I यहां पर जीवित प्रथम पुजारी की भी समाधि है कहां जाता है कि भटनेर किले के जो राजा थे उनके पास धन की कमी आने के कारण जब वह पुजारी के पास गए तो अपना हाल सुनाया तब पुजारी जी ने उनको अपनी एक गुदडी दी और कहा कि जितने पैसे की जरूरत है उतने ही लेना फिर मेरे को वापस कर देना , पर राजा की नियत में खोट आ गया I उन्होंने पुजारी जी की हत्या करने की योजना बनाई, पर पुजारी जी तो बच गए पर उन्होंने हनुमानगढ़ को श्राप दिया की इस दुर्ग में कोई भी राज नहीं कर पाएगा तो उन्होंने जीवित समाधि ही ले ली I यह मंदिर 500 साल पुराना है पर बना भी गुंबद की तरह ही हुआ है और लोगों की श्रद्धा भी बहुत है। भद्रकाली माता की जय।

 

संकेत ने इस ऐतिहासिक मंदिर की विस्तृत जानकारी वीडियो के माध्यम से डिजिटल बाल मेला को भेजी है। जिसे आप डिजिटल बाल मेला के यूट्यूब चैनल पर देख सकते हैं। डिजिटल मेला के इस अभियान “रूट्स ऑफ राजस्थान” की शुरुआत राजस्थान के 75वें स्थापना दिवस के मौके पर की है। आपको बता दें की इस अभियान का उद्देश्य बच्चों के दृष्टिकोण से राजस्थान की कला, संस्कृति एवं पर्यटन को बढ़ावा देना एवं बच्चों को राजस्थान की विरासत से परिचित करवाना है।
इसमें बच्चों को आठ से दस मिनट तक की वीडियो बनानी है जिसमें राजस्थान के पर्यटन स्थल एवं राजस्थान की कला और संस्कृति का विवरण हो। ये अभियान 30 जून तक चलेगा।
अपनी वीडियो को आप 30 जून तक डिजिटल बाल
मेला के टेलीग्राम, वाट्सएप एवं अधिकारिक वेबसाइट पर भेज सकते हैं। हर महीने सबसे श्रेष्ठ वीडियो भेजने वाले बच्चे को मोबाइल फोन ईनाम में मिलेगा एवं टॉप 100 बच्चों को विश्व पर्यटन दिवस पर यानी 27 सितंबर को तीन दिन का जयपुर भ्रमण करवाया जाएगा एवं तभी प्रथम स्थान पर रहने वाले बच्चे को पचास हज़ार का ईनाम, द्वितीय स्थान को बीस हज़ार, तृतीय स्थान को दस हज़ार के ईनाम से नवाज़ा जाएगा।
डिजिटल बाल मेला इससे पहले भी बच्चों की रचनात्मकता बढ़ाने के लिए “शेड्स ऑफ कोविड”
म्यूजियम थ्रू माय आइज” जैसे अभियानों का आयोजन कर चुका है।

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