जानिए मलाला दिवस के बारे में।
बाल लेखिका कशिश।
क्या आप किसी ऐसे समाज के कल्पना कर सकते हैं, जिसमें आपकी वैचारिक आजादी को पैरों तले रोंदने की कोशिश की जाती हो।क्या आप ऐसे समाज को सभ्य कह सकते हैं, जिसमें किसी को भी शिक्षा के अधिकार से वंचित रखा जाए।
आज हम एक महिला के बारे में जानेंगे जिन्होंने हमेशा जुल्म के खिलाफ अपनी आवाज उठाई और महिलाओं के अधिकारों के लिए साहस का प्रत्येक बन गई। पाकिस्तान की समाज सेवी नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई के जन्मदिन को ही “मलाला दिवस” के नाम से जाना जाता है।
मलाला दिवस को मानवता के बेहतर भविष्य के रूप में देखा जा सकता है,क्योंकि इस दिन नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई का जन्म हुआ था।
संयुक्त राष्ट्र में युवा कार्यकर्ता ‘मलाला यूसुफजई’ के योगदान को सम्मानित करने के लिए 12 जुलाई को “विश्व मलाला दिवस” के रूप में घोषित किया है। मलाला दिवस को दुनिया भर में महिलाओं और बच्चों के अधिकारों का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है।
लड़कियों की शिक्षा के लिए सार्वजनिक रूप से आवाज उठाने वाली मलाला पर तालिबान बंदूकधारियों द्वारा 9 अक्टूबर 2012 को गोली चलाई गई थी। हमले में गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद मलाला जल्द ही स्वस्थ होकर लोगों के बीच लौटी और पहले की तुलना में उनके विचारों में उग्रता दिखाई दी और लिंग अधिकारों के लिए उनकी वकालत की उन्होंने एक गैर लाभकारी संस्था ‘मलाला फंड’ की स्थापना की है। जो युवा लड़कियों को स्कूल जाने में मदद करने और अंतर्राष्ट्रीय बेस्ट सेलर ‘I am Malala’ नामक पुस्तक की सह-लेखिका भी है।
मलाला को कई पुरस्कारों और सम्मानों से सम्मानित किया गया है जो इस प्रकार है:
•उन्हें पाकिस्तान सरकार द्वारा पहली बार साल 2012 में राष्ट्रीय युवा शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
•वर्ष 2014 में वह 17 साल की उम्र में ‘नोबेल शांति’ पुरस्कार पाने वाली सबसे कम उम्र की प्राप्तकर्ता बन गई।
•संयुक्त राष्ट्र ने 2019 के अंत में जारी अपनी समीक्षा रिपोर्ट में मलाला को दशक में “दुनिया में सबसे प्रसिद्ध किशोरी” घोषित किया था।
हर साल 12 जुलाई को मनाए जाने वाला ‘मलाला दिवस’ एक ऐसा दिन है,जिसको महिला सम्मान और महिलाओं की शिक्षा के अधिकारों के पक्ष में सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है !
राजस्थान के 75वें स्थापना दिवस के मौके पर डिजिटल बाल मेला ने नये अभियान “रूट्स ऑफ राजस्थान” की है। आपको बता दें की इस अभियान का उद्देश्य बच्चों के दृष्टिकोण से राजस्थान की कला, संस्कृति एवं पर्यटन को बढ़ावा देना एवं बच्चों को राजस्थान की विरासत से परिचित करवाना है।
इसमें बच्चों को आठ से दस मिनट तक की वीडियो बनानी है जिसमें राजस्थान के पर्यटन स्थल एवं राजस्थान की कला और संस्कृति का विवरण हो।
अपनी वीडियो को आप डिजिटल बाल मेला के टेलीग्राम, वाट्सएप एवं अधिकारिक वेबसाइट पर भेज सकते हैं। हर महीने सबसे श्रेष्ठ वीडियो भेजने वाले बच्चे को मोबाइल फोन ईनाम में मिलेगा एवं टॉप 100 बच्चों को विश्व पर्यटन दिवस पर यानी 27 सितंबर को तीन दिन का जयपुर भ्रमण करवाया जाएगा एवं तभी प्रथम स्थान पर रहने वाले बच्चे को पचास हज़ार का ईनाम, द्वितीय स्थान को बीस हज़ार, तृतीय स्थान को दस हज़ार के ईनाम से नवाज़ा जाएगा।
डिजिटल बाल मेला इससे पहले भी बच्चों की रचनात्मकता बढ़ाने के लिए “शेड्स ऑफ कोविड”
म्यूजियम थ्रू माय आइज” जैसे अभियानों का आयोजन कर चुका है।
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