कब और क्यों मनाई जाती है मकर संक्रांति?
शिवाक्ष शर्मा।
यह पर्व हर साल सूर्य देव के मकर राशि में गोचर करने की तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन साधक गंगा समेत पवित्र नदियों में स्नान-ध्यान करते हैं। साथ ही सूर्य देव की पूजा-उपासना करते हैं। इसके बाद दान-पुण्य करते हैं। सनातन शास्त्रों में निहित है कि मकर संक्रांति तिथि पर गंगा स्नान करने से साधक को अक्षय फल की प्राप्ति होती है। साथ ही सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि मकर संक्रांति सूर्य गोचर के अलावा क्यों मनाई जाती है?
शनिदेव के वर्ण यानी रूप को देख सूर्य देव ने उन्हें अपनाने से मना कर दिया। उस समय माता छाया ने सूर्यदेव को कुष्ट रोग से पीड़ित होने का श्राप दिया। यह सुन सूर्य देव क्रोधित हो उठे। इसके बाद सूर्य देव ने शनिदेव और माता छाया के ठहरने वाले स्थान को भस्म (आग से जला दिया) कर दिया। कालांतर में यम देव ने सूर्य देव के क्रोध को शांत किया। साथ ही सूर्य देव को माता छाया के लिए अपने क्रोध को स्नेह में बदलने का अनुरोध किया। तब सूर्य देव ने माता छाया को क्षमा प्रदान की।
इसके बाद सूर्य देव अपने पुत्र शनिदेव से मिलने पहुंचे। कहते हैं कि सूर्य देव के मकर राशि में गोचर करने की तिथि पर ही दोनों की भेंट (मिलन) हुई थी। आसान शब्दों में कहें तो मकर संक्रांति तिथि पर सूर्य देव अपने पुत्र शनिदेव से मिलने पहुंचे थे। उस समय घर पर कुछ न होने पर शनिदेव ने अपने पिता सूर्य देव को तिल अर्पित किया था। अत: मकर संक्रांति तिथि पर सूर्य देव को तिल अर्पित की जाती है। इस दिन से पिता और पुत्र यानी सूर्य देव और शनिदेव के संबंध मधुर हुए थे।
संक्रांति क्या है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने या गोचर करने को संक्रांति कहा जाता है. पूरे साल में सूर्य देव 12 राशियों में गोचर करते हैं. एक राशि में सूर्य देव 30 दिनों तक रहते हैं. इस प्रकार एक साल में 12 संक्रांति पड़ती हैं लेकिन इन सभी संक्रांति में मकर संक्रांति और मीन संक्रांति को सबसे महत्वपूर्ण माना जता है.
मकर संक्रांति मनाने का क्या कारण है?
जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे सूर्य का संक्रमण काल कहा जाता है. इस दिन को ही मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है. देश के कई हिस्सों में मकर संक्रांति को खिचड़ी भी कहते हैं.
हिंदू धर्म में मकर संक्रांति क्यों मनाई जाती है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन ग्रहों के राजा सूर्य देव धनु राशि को छोड़कर अपने पुत्र शनि की राशि यानी मकर राशि में आते हैं. सूर्य और शनि का संबंध मकर संक्रांति के पर्व से काफी महत्वपूर्ण हो जाता है. इस दिन से खरमास समाप्त हो जाता है और एक बार फिर से सभी और मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है. हिंदू धर्म शास्त्रों में निहित कथाओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन ही गंगा जी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई सागर में जाकर मिली थीं.
अधिक जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स को फॉलो करें –
WhatsApp no. — 8005915026
Facebook – https://www.fb.com/digitalbaalmela/
Instagram – https://instagram.com/digitalbaalmela
Twitter – https://twitter.com/DigitalBaalMela
YouTube – https://bit.ly/3xRYkNz

