आईए जानते हैं राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के बारे में।
शिवाक्ष शर्मा।
देश में हर साल दो बार राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाता है। पहला 10 फरवरी को और दूसरा नेशनल डीवॉर्मिंग डे 10 अगस्त को मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य है बच्चों में बढ़ रही कृमि संक्रमण को रोकना और इससे बचाव के प्रति जागरूकता फैलाना। इस दिन विभिन्न सार्वजनिक जागरूकता अभियान का आयोजन किया जाता है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसके बारे में जागरूक किया जा सके। गौरतलब है कि आज के समय में लाखों बच्चे इस बीमारी से जूझ रहे हैं, इसलिए इसके बारे में समझना बहुत जरूरी है।
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का इतिहास क्या है?
इस दिन (National Deworming Day in Hindi) को मनाने की शुरुआत स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा साल 2015 में की गई थी। इस दिवस को मनाने का का उद्देश्य है देश को कृमि मुक्त बनाना। कृमि रोग बच्चों की आंतों को प्रभावित करता है जिसकी वजह से बच्चों में मानसिक विकार की स्थिति पैदा हो सकती है। यह रोग इंसानों और जानवरों दोनों के लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं है। इसको ध्यान में रखते हुए 2015 से हर साल इस दिन देश के सभी आंगनवाड़ी और स्कूलों में बच्चों को दवाई दी जाती है। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाता है ताकि लोग इस रोग की गंभीरता को समझ सकें और बच्चों की ओवरऑल हेल्थ में सुधार लाया जा सकें।
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस क्यों मनाया जाता है?
कृमि संक्रमण एक आम समस्या है जो अनुमानित रूप से 1 से 19 वर्ष की आयु के बच्चों को प्रभावित करती है। कृमि संक्रमण की वजह से व्यक्ति को एनीमिय, दस्त, पेट दर्द, कुपोषण और मानसिक विकास संबंधी दिक्कतें होने की संभावनाएं हैं। ऐसे में नेशनल डीवॉर्मिंग डे बच्चों के स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन बच्चों को कृमिनाशक दवा देने का अभियान चलाया जाता है जिससे उन्हें कृमि संक्रमण से बचाने में मदद मिलती है।
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कब मनाया जाता है?
भारत में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस वर्ष में दो बार 10 फरवरी और 10 अगस्त को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य 1 से 19 वर्ष की आयु के बच्चों और किशोरों को परजीवी कृमि संक्रमण से बचाने के लिए कृमि मुक्त करना है। सरकार बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और समग्र कल्याण में सुधार के लिए स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से एल्बेंडाजोल की गोलियाँ प्रदान करती है।
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का महत्व क्या है?
भारत में 10 फरवरी को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस बच्चों और किशोरों में परजीवी कृमि संक्रमण से निपटने के उद्देश्य से मनाया जाता है। यह जागरूकता को बढ़ावा देता है और स्वास्थ्य, पोषण और संज्ञानात्मक विकास को बेहतर बनाने के लिए कृमि मुक्ति दवा देता है और इससे बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन और समग्र कल्याण सुनिश्चित होता है।
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस कैसे मनाया जाता है?
राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर कई ऐसे अभियान चलाए जाते हैं जिसमें परिवार को बच्चों के लिए कृमिनाशक दवा लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इसी के साथ कृमि संक्रमण के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया जाता है और इस दिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा बच्चों को एल्बेंडाजोल नामक एक सुरक्षित और प्रभावी कृमिनाशक दवा दी जाती है।
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