जानिए अंतरराष्ट्रीय खनन जागरूकता दिवस के बारे में।
शिवाक्ष शर्मा।
8 दिसंबर 2005 को यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली यानी संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 4 अप्रैल को खदान जागरूकता और खनन कार्रवाई में सहायता के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस की घोषणा की थी। इसकी शुरूआत 4 अप्रैल 2006 को हुई थी।
खादान दिवस को मनाने का उद्देश्य उन देशों में राष्ट्रीय खदान-कार्य क्षमता को बढ़ाना और विकसित करने में सहयोग प्रदान करना है जहां खदान के साथ ही विस्फोटक सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करते हैं। इसके लिए राज्यों के प्रयास, संबंधित संगठनों के साथ संयुक्त राष्ट्र द्वारा भी मदद की जाती है। लोकल और नेशनल लेवल पर स्वास्थ्य और लोगों के जीवन में सामाजिक और आर्थिक विकास को भी बढ़ावा दिया जाता है। साथ ही लोगों को खनन जोखिम शिक्षा के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करना जो कि उनकी सुरक्षा के लिए बहुत आवश्यक है। इसके अलावा, विस्फोटक खतरे का पता लगाना, उसे नष्ट करना और इस क्षेत्र में रहने और काम करने वाले लोगों के जीवन को बचाना दिवस का मुख्य कार्य है।
नेशनल माइन एक्शन अथॉरिटी (NMAA), जिनेवा इंटरनेशनल सेंटर फॉर ह्यूमैनिटेरियन डिमाइनिंग (GICHD) और यूनाइटेड नेशंस माइन एक्शन सर्विस (UNMAS) के सहयोग से 4 अप्रैल, 2025 का थीम “सुरक्षित भविष्य यहीं से शुरू होता है” है। इस थीम के तहत कई जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं। इसी के साथ डिजिटल बाल मेला ने “रूट्स ऑफ राजस्थान” नाम से एक नया अभियान शुरू किया है
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