आदित्य शर्मा।
जयपुर। हमारे नेताओं ने लोकतंत्र की संरचना मात्र बड़ो को ध्यान में रखते हुए ही नहीं की थी, यद्यपि लोकतंत्र भारत के हर नागरिक का अधिकार है। इस लोकतंत्र में बच्चों को वोट देने का अधिकार नहीं है, परन्तु इस कारणवश उनकी बात न सुनना या उनकी सहभागिता को नकार देना कही से भी सही नहीं है। बच्चे ही आगे जाकर आपके भावी वोटर बनते हैं, ऐसे में उनको भी अपनी बात और अपने से जुड़े मुद्दों को रखने का मंच मिलना ही चाहिए, और अगर कोई लोकतान्त्रिक प्रणाली यह करने में असफल साबित होती है तो वह लोकतंत्र की हत्या की जिम्मेदार है।
इसकी पैरवी “मैं भी बाल सरपंच” अभियान के तहत डिजिटल बाल मेला और यूनिसेफ ने की है। इस अभियान में “बाल मित्र” पंचायत की संकल्पना करके आपकी ग्राम पंचायत को बच्चों के प्रति अनुकूल बनाने की कोशिश की जाएगी। ऐसी पंचायत जिसमें बच्चे अपनी बात रख सके, जिसमें बच्चों की बात सुनी जाए। इस पंचायत के सरपंच या सचिव बच्चे की बात सुने और उनकी समस्याओं का हर संभव निवारण हो। पंचायत में बाल सहभागिता को बढ़ावा दिया जाए। अगर आपकी पंचायत ऐसा करने में सफल होती है तो आपकी पंचायत को “बाल मित्र” का खिताब दिया जाएगा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें की डिजिटल बाल मेला का बच्चों की राजनितिक जागरूकता बढ़ाने का यह दूसरा प्रयास हैं। इसके पहले DBM (डिजिटल बाल मेला) ने बच्चों को विधायकी प्रणाली के बारे में जागरूक किया था। इतना ही नहीं इन 200 बच्चों का वीडियो के आधार पर चयन कर राजस्थान बाल सत्र का आयोजन भी किया। इस सत्र का मौका बच्चों को राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सी पी जोशी ने बच्चों को दिया था।
“मैं भी बाल सरपंच” अभियान में भाग लेने के लिए डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट www.digitalbaalmela.com पर रजिस्टर करें या इस नंबर 8005915026 पर रजिस्टर करें। जानकारी के लिए डिजिटल बाल मेला के सोशल मीडिया हैंडल्स फॉलो करें…….
फेसबुक – https://www.fb.com/digitalbaalmela/
इंस्टाग्राम – https://instagram.com/digitalbaalmela
ट्विटर – https://mobile.twitter.com/DigitalBaalMela
यूट्यूब – ‘

