तनय मिश्रा।
डिजिटल बाल मेला ने यूनिसेफ ने साथ मिलकर बच्चों के लिए एक अनूठे और नए तरह के अभियान की शुरुआत की है। “मैं भी बाल सरपंच” नाम के इस अभियान के ज़रिए राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को पंचायती राज प्रणाली के प्रति जागरूक करने का काम किया जाएगा। इस पहल के तहत बच्चों को “मैं भी बाल सरपंच” अभियान से जोड़ने में इस अभियान के बाल पंचायत लीडर्स की भी अहम भूमिका रहेगी।
जयपुर। भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में शासन व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए पंचायती राज व्यवस्था की स्थापना की गयी है। इस व्यवस्था के सफल संचालन के लिए वयस्क सहभागिता के साथ ही बाल सहभागिता का भी योगदान होना चाहिए। इसी बाल सहभागिता को सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल बाल मेला ने यूनिसेफ के साथ मिलकर गाँव के बच्चों के लिए “मैं भी बाल सरपंच” अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान के माध्यम से डिजिटल बाल मेला राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को राज्य की पंचायती राज व्यवस्था के प्रति जागरूक करने का कार्य करता है। इस अभियान के तहत राज्य की 11,283 पंचायतों से बच्चों को बाल सरपंच बनने का मौका मिलेगा। इस अभियान में बाल सरपंचों की भागीदारिता में उन बच्चों के साथ ही बाल पंचायत लीडर्स की भी अहम भूमिका है। आइए जानते हैं इन बाल पंचायत लीडर्स के बारें में।
कौन हैं बाल पंचायत लीडर्स?
डिजिटल बाल मेला ने इससे पहले 14 नवंबर 2021 को बाल दिवस के अवसर पर राजस्थान विधानसभा भवन में करीब 1 घंटे के लिए “बच्चों की विधानसभा” का आयोजन किया था। इस अभियान के तहत देशभर से 200 बच्चों ने हिस्सा लिया। इन्हीं में से करीब 10 बच्चों को उनके वीडियो के आधार पर बाल पंचायत लीडर्स के रूप में चुना गया है।
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बाल पंचायत लीडर्स की क्या रहेगी भूमिका?
प्रजातंत्र में जिस तरह से राजा से बड़ा राजा को बनाने वाले यानि की “किंग-मेकर” को माना जाता है, ठीक उसी तरह ये नन्हें बाल पंचायत लीडर्स भी “मैं भी बाल सरपंच” अभियान में किंग-मेकर की भूमिका निभाएंगे। इन बाल पंचायत लीडर्स को अपने ब्लॉक/पंचायत क्षेत्र का लीडर बनाया गया है। ऐसे में इन नन्हें लीडर्स की यह ज़िम्मेदारी होगी कि वो ज़्यादा से ज़्यादा बच्चों को “मैं भी बाल सरपंच” अभियान से जोड़े। इसके लिए उन्हें अपने भाई-बहनों, दोस्तों, अपने स्कूल के साथ ही आस-पास के स्कूलों के बच्चों को भी इस अभियान के प्रति जागरूक करने का कार्य करना हैं। इसके लिए ये बाल पंचायत लीडर्स अपने स्कूल के प्रिंसिपल, अध्यापकों के साथ ही अपनी पंचायत के सरपंच की सहायता भी ले सकते हैं और बाल पंचायत का आयोजन करके बच्चों को “मैं भी बाल सरपंच” अभियान के बारें में बताकर इसमें उनकी भागीदारी सुनिश्चित भी कर सकते हैं। साथ ही बाल पंचायत लीडर्स पोस्टर्स और पैम्फलेट्स के ज़रिए भी अपना संदेश ज़्यादा से ज़्यादा बच्चों तक पहुँचाकर उन्हें इस अभियान में शामिल कर सकते हैं।

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डिजिटल बाल मेला और यूनिसेफ के “मैं भी बाल सरपंच” अभियान के माध्यम से देश के गाँवों और पंचायती क्षेत्र के बच्चों को पंचायती राज प्रणाली के प्रति जागरूक किया जाता है। इस अनूठे अभियान के तहत डिजिटल बाल मेला बच्चों के लिए विभ्भिन ऑनलाइन और ऑफलाइन सत्र का भी आयोजन करता है, जिनमें राज्य के दिग्गज नेता बच्चों से पंचायत राज प्रणाली पर संवाद भी करेंगे। इन बच्चों को राजस्थान के गाँव, ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और विद्यालयों के माध्यम से जोड़ा जाएगा। इस अभियान में कई तरह के सत्र, वीडियो एंट्री, क्विज़ और डिबेट प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की जाती हैं। इससे पहले डिजिटल बाल मेला “शेड्स ऑफ कोविड” पेंटिंग प्रदर्शनी का भी आयोजन कर चुका है।
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अगर आपका बच्चा भी “मैं भी बाल सरपंच” अभियान से जुड़ना चाहता है, तो आप डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट www.digitalbaalmela.com पर रजिस्टर कर सकते हैं या इस नंबर 8005915026 पर वॉट्सऐप/टेलीग्राम के ज़रिए भी रजिस्टर कर सकते हैं। जानकारी के लिए डिजिटल बाल मेला के सोशल मीडिया हैंडल्स फॉलो करें…….
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