” मैं भी बाल सरपंच”:- जब बच्चे बनेंगे क्षेत्र में सक्रिय उसके बाद तय की जा सकेगी ग्राम पंचायत में उनकी भूमिका तय: फुलेरा विधायक निर्मल कुमावत……

“पंचायती राज में बच्चों की भूमिका” विषय पर किया संवाद …..

 

आदित्य शर्मा।

जयपुर। 5 दिसंबर को “मैं भी बाल सरपंच” अभियान में फुलेरा से 3 बार के विधायक निर्मल कुमावत ने “बाल सरपंचों” से सीधा संवाद सादा। ऑनलाइन हुए इस सत्र का विषय पंचायती राज में बच्चों की भूमिका रखा गया। यह वही बाल सरपंच बच्चे थे जो राजस्थान भर में हुई बाल पंचायतों से चुनकर आए थे। इस ऑनलाइन सत्र का संचालन डिजिटल बाल मेला की प्रिया शर्मा ने किया साथ ही चूरू के जितेश डूडी और नागौर की ललिता बाबल ने भी वेलकम स्पीच और डिजिटल बाल मेला का परिचय दिया। अपने संवाद के दौरान विधायक कुमावत ने बच्चों से अपने क्षेत्र में सक्रिय होने की बात कही, उनका मानना है की ग्राम पंचायतों में बच्चों की भूमिका यही है की वह अपने क्षेत्र के प्रति सक्रिय हो। उन्हें पता हो की उनके गांव में क्या सही हो रहा है और क्या गलत। बच्चे ग्राम सभाओं में जाए देखे सुने की गांव के क्या मुद्दे है।

शाम 6 बजे हुए इस ऑनलाइन संवाद सत्र में बच्चों ने विधायक से कई प्रश्न भी पूछे। हनुमानगढ़ के पारस ने सवाल किया की राज्य सरकारों की तरह ग्राम पंचायतों के पास अपना आय का स्त्रोत क्यों नहीं है। जिसका जवाब देते हुए कुमावत जी का कहना है की यह लगभग असम्भव है की ग्राम पंचायतें खुदकी आय से चल जाए क्योंकि भारत की ज्यादातर ग्राम पंचायतों में अभी इतना विकास और व्यापार नहीं है।

इस सत्र में करौली से जुड़े रमाकांत ने सरपंच और विधायक में वैचारिक मतभेद के कारण ग्राम पंचायत को पहुंची हानि पर सवाल पूछा। जिसके जवाब देते हुए उन्होंने बताया की ग्राम की भलाई के लिए अगर सरपंच को विधायक से सुलह करनी पड़े तो उन्हें करना चाहिए, साथ ही सरपंच एक निष्पक्ष कड़ी होती है तो वैचारिक मतभेद का तो कोई सवाल ही नहीं होनी चाहिए।

वीरेंद्र ने मनिनीय विधायक से यह भी पूछा की वोटिंग को हाथो हाथ क्यों नहीं गीना जाता, जिसके उत्तर में उन्होंने कहा की वोटिंग करवाने वाली संस्था एक स्वतंत्र निकाय होती है और वह अपने हिसाब से फैसला करती है की वोटिंग की गिनती कब की जाएगी। साथ ही वोटिंग से छेड़ छाड़ ना होने के डर से भी वोटिंग की गिनती गुप्त रूप से की जाती है।

नागौर की ललिता बाबल ने भी इस सत्र में सवाल किया, उन्होंने पूछा की वार्ड सभा का अयोजन क्यों नहीं होता? जिसके जवाब में विधायक ने कहा की शायद ऐसा कोई प्रोविजन पंचायती राज व्यवस्था में नहीं पर आपका कहना सही है वार्ड सभा तो दूर की बात है वार्ड पंच तो ग्राम सभा में भी उपस्थित नहीं रहे। इसकी जिम्मेदारी सरपंचों को लेनी चाहिए।

आपकी जानकारी के बता दें कुल 1 घंटे चले इस कार्यक्रम में राजस्थान के 7 संभागों से बच्चे जुड़े थे। डिजिटल बाल मेला की जान्हवी शर्मा ने बताया की यह वही बच्चे है जो आने वाले समय में “मैं भी बाल सरपंच” अभियान के तहत होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे

यदि आपका बच्चा भी नेतृत्व की क्षमता रखता है और “बाल सरपंच” बनकर अपने गाँव का विकास करना चाहता है तो आज ही वीडियों बनाकर भेजें डिजिटल बाल मेला के मोबाइल नंबर +918005915026 पर| अधिक जानकारी के लिए डिजिटल बाल मेला के सोशल मीडिया हैंडल्स को फॉलो करें –

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