“मैं भी बाल सरपंच”- बाल पंचायतों में बच्चों ने क्या सीखा?

आदित्य शर्मा|

जयपुर| जैसा की सभी को पता है की 15 अगस्त से डिजिटल बाल मेला और यूनिसेफ के अभियान “मैं भी बाल सरपंच” की शुरुआत हुई| इसमें राजस्थान के 7 संभागों की 10 ग्राम पंचायतों में “बाल पंचायत” का आयोजन किया गया| इन “बाल पंचायतों” में बच्चों ने लोकतंत्र की सबसे निचली कड़ी पंचायती राज के बारे में जाना| इसका इतिहास, इसके कार्य इसमें बच्चों के अधिकार से लेकर वह इस व्यवस्था में सक्रीय भूमिका कैसे निभा सकते है यह जाना|

8 जिलों में हुई इन “बाल पंचायतों” में बच्चों के लिए कई तरह की गतिविधियों का आयोजन हुआ| इसमें सबसे पहले बच्चों के लिए प्रश्नोत्तरी सत्र रखा गया| इसके बाद बच्चों को “बाल सरपंच” के लिए दावेदारी पेश करनी होती थी| यह होने के बाद बच्चे अपने स्थानीय सरपंच से सवाल करते और आम जन की समस्याओं को उठाते, जिनपर सरपंच को जवाबदेही स्थापित करनी होती है| इन “बाल पंचायतों” के आखिरी में बच्चे दावेदारी पेश करने वाले बच्चों के लिए बैलट बॉक्स प्रक्रिया के तहत वोटिंग भी करते है|

आपकी जानकारी के लिए बता दें की इस अभियान का मकसद लोकतंत्र में बच्चों का प्रतिनिधित्व तय करना है| अभी इस अभियान के तहत राजस्थान भर से चुने गए 30 बाल प्रतिनिधि राजस्थान अलग-अलग विधानसभा क्षेत्र से आने वाले विधायकों से संवाद कर रहे है, और अपनी राजनीतिक जागरूकता बढ़ा रहे है|

यदि आपका बच्चा भी नेतृत्व की क्षमता रखता है और “बाल सरपंच” बनकर अपने गाँव का विकास करना चाहता है तो आज ही वीडियों बनाकर भेजें डिजिटल बाल मेला के मोबाइल नंबर +918005915026 पर| अधिक जानकारी के लिए डिजिटल बाल मेला के सोशल मीडिया हैंडल्स को फॉलो करें –

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