राजस्थान के पारस माली ने दी अंतर्राष्ट्रीय मन शरीर कल्याण दिवस के बारे में जानकारी।
बाल लेखक पारस माली।
अंतर्राष्ट्रीय मन शरीर कल्याण दिवस हर वर्ष 3 जनवरी को मनाया जाता है। इस दिवस के द्वारा लोगों को मस्तिष्क और शरीर को स्वस्थ रखने के प्रति जागरूक किया जाता है। यह दिवस हमें बताता है किसी को भी मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों से अकेले नहीं जूझना चाहिए फिर भी बहुत से बच्चे और युवा ऐसा करते हैं कि वह अपनी बॉडी और दिमाग को फ्रेश करते ही नहीं है जिसके कारण उनकी मानसिक और शरीर की जो बीमारियां है वह फैलती रहती है। हमें शरीर और दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए कुछ उपाय करने चाहिए जिसमें से एक मुख्य उपाय है। योगा करना अगर हम योग करते हैं तो हमारा दिमाग स्वस्थ और शरीर अच्छा रहता है जिसके कारण बीमारियां भी काम आती है तो हमें हमेशा सुबह 1 घंटे योगा करना चाहिए की जिससे सभी प्रकार की जो बीमारियां हैं वह हमसे दूर रहे।
अंतर्राष्ट्रीय मन शरीर कल्याण दिवस का इतिहास।
हिप्पोक्रेटस को प्राकृतिक चिकित्सा आंदोलन के संस्थापक के रूप की पहचान जाता है जो हजारों वर्षों से अस्तित्व में है। सोनी दुनिया भर में दवा का उपयोग कैसे किया जाता है इस पर चल रही जांच शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और अंतरराष्ट्रीय मन शरीर कल्याण दिवस मन और शरीर के बीच महत्वपूर्ण संबंध के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देता है और लोगों को वैलनेस के सभी पहलुओं को महत्व देने और उनका आनंद लेने के लिए प्रेरित करता है। चाहे वह एक स्वस्थ और आशावादी दिमाग को जो स्वस्थ शरीर को प्रोत्साहित करता है। यार दिमाग में कुछ विपरीत विज्ञान ने हाल ही में मन शरीर कल्याण के बीच संबंध की पुष्टि की है और इस पर आवश्यक विचार किया है। इसी महत्व को समझने के लिए यह दिवस 3 जनवरी को मनाया जाता है।
धन्यवाद।
डिजिटल बाल मेला ने जनवरी माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।
डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।
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