राजस्थान की इशिका ने बताया अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी दिवस के बारे में।

बाल लेखिका इशिका।

 अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी दिवस हर साल 18 दिसंबर को मनाया जाता है इस दिन का एक मुख्य उद्देश्य है लोगों को इस बात के लिए शिक्षित करना है कि हर प्रवासी का सामान के साथ व्यवहार हो करना मूलभूत आवश्यकताओं में से एक है। यह दिन अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों के सामने आने वाली चुनौतियां और कठिनाइयों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी दिवस का इतिहास।

    18 दिसंबर 1990 को संयुक्त राष्ट्रीय महासभा ने सभी प्रवासी के अधिकारों और उनके परिवारों के सदस्य के संरक्षण पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को अपनाया 4 दिसंबर 2000 को UNGA शरणार्थियों और प्रवासियों की बड़े आंदोलन को संबोधित करने के लिए एक उच्च स्तरीय सम्मेलन किया गया इस सम्मेलन में मानवीय दृष्टिकोण के साथ देश को एक साथ लाने का लक्ष्य था। उसके बाद 18 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय प्रवासी दिवस मनाया जाने लगा।

अंत में मैं कहना चाहूंगा आप सभी को अंतरराष्ट्रीय प्रवासी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

डिजिटल बाल मेला ने दिसंबर माह के महत्वपूर्ण दिनों पर एक लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया है। प्रतियोगिता के अंत में जिस बच्चे की लेखन कला सबसे अच्छी होगी उसे 1100 रुपये का नकद पुरस्कार भी दिया जाएगा। आप भी इसमें भाग ले सकते हैं। आपके द्वारा लिखे गए लेख डिजिटल बाल मेला में भेजें। बाल लेखकों द्वारा लिखे गए आलेखों को डिजिटल बाल मेला की वेबसाइट पर पोस्ट किया जाएगा।

डिजिटल बाल मेला की शुरुआत कोरोना काल में बच्चों की बोरियत को दूर करने के लिए जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह विद्यालय की छात्रा जान्हवी शर्मा द्वारा की गई थी। इसके तहत अभी तक कई अभियानों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें “बच्चों की सरकार कैसी हो?” “मैं भी बाल सरपंच” “कौन बनेगा लोकतंत्र प्रहरी” “म्यूजियम थ्रू माय आइज” आदि शामिल हैं।

अधिक जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल्स को फॉलो करें –

Facebook – https://www.fb.com/digitalbaalmela/

Instagram – https://instagram.com/digitalbaalmela

Twitter – https://twitter.com/DigitalBaalMela

YouTube –

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *