नियम 324 के तहत सरकार को दिया सुझाव….
शिवाक्ष शर्मा.
शिमला. 12 जून को हिमाचल प्रदेश विधानसभा स्पीकर की अध्यक्षता में राज्य ऐतिहासिक बाल सत्र का साक्षी बना. इस विशेष सत्र के लिए देश भर से 68 बच्चों का चयन किया गया था, जिसकी प्रक्रिया कुल तीन माह चली थी. “बाल प्रतिनिधि” बाल मुद्दों पर अपनी आवाज़ शिमला स्थित विधानसभा भवन में मुखर करते नज़र आए। शिमला के अरुणोदय शर्मा का चयन इस सत्र के लिए हुआ था व उन्हें सामाजिक न्याय एवं कल्याण मंत्री का कार्यभार मिला. अरुणोदय ने नियम 324 के तहत अपनी बात सदन के समक्ष रखी. अरुणोदय ने दिव्यांग बच्चों को गोद लेने वाले अभिभावकों को सरकारी योजनाओं के लाभ मे प्राथमिकता व विशेष प्रोत्साहन देने की बात कही. साथ ही अरुणोदय ने सरकारी आश्रम और दिव्यांग बच्चों के लिए विद्यालयों की संख्या को बढ़ाने का कार्य करने का सुझाव सरकार को दिया। अरुणोदय ने बेसहारा बुजुर्गों की बढ़ती संख्या पर भी चिंता व्यक्त की व मांग की कि बेसहारा बुजुर्गों को बिना दादा दादी वाले घरों में ‘अडॉप्ट’ करवाने के लिए नीति बनाई जाये.
इस सत्र में मुख्य अतिथि के तौर पर राज्य के मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुक्खू एवं बतौर विशिष्ठ अतिथि राज्यसभा उप-सभापति श्री हरिवंश नारायण सिंह, शामिल हुए. इस सत्र की ख़ास बात यह रही की बच्चों ने ही मुख्यमंत्री, नेता-प्रतिपक्ष, स्पीकर समेत सभी पदों की भूमिका निभाई व एक दिन के लिए राज्य की विधानसभा का संचालन किया।
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