मैं भी बाल सरपंच: शिक्षामंत्री बुलाकी दास कल्ला के पौत्र राघव कल्ला का पंचायती राज के इतिहास के विषय में संबोधन

तनय।

डिजिटल बाल मेला ने अपने नवाचारी अभियान “मैं भी बाल सरपंच” की आधिकारिक शुरुआत 2 अक्टूबर को नागौर से की। इस अवसर पर राजस्थान के वर्तमान शिक्षामंत्री बुलाकी दास कल्ला के पौत्र राघव कल्ला ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

जयपुर। 2 अक्टूबर 1959 को राजस्थान के नागौर जिले में ही सबसे पहले पंचायती राज की शुरुआत हुई थी। इसके ठीक 63 वर्ष बाद इसी दिन नागौर में एक बार फिर इतिहास लिखा गया, जिसका गवाह पूरा देश बना। डिजिटल बाल मेला के नवाचारी अभियान “मैं भी बाल सरपंच” की आधिकारिक शुरुआत 2 अक्टूबर को नागौर के ही बरांगना से की गई। इस अवसर पर एक “बाल पंचायत” का आयोजन किया गया, जिसमें राजस्थान के वर्तमान शिक्षामंत्री बुलाकी दास कल्ला के पौत्र राघव कल्ला ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।

क्या कहा राघव कल्ला ने?

पंचायती राज के इतिहास के बारे में बात करते हुए राघव कल्ला ने कहा कि 2 अक्टूबर को देशभर में लोग गाँधी जयंती के तौर पर देखते हैं। पर यह दिन सिर्फ गाँधी जयंती तक ही सीमित नहीं है। इस दिन को देश के इतिहास में एक एक महत्वपूर्ण दिन के रूप में देखा जाता है। इसका कारण है पंचायती राज की स्थापना। देश के ग्रामीण क्षेत्रों में शासन व्यवस्था के सुचारु संचालन के लिए 2 अक्टूबर 1959 को देश में पहली बार पंचायती राज की स्थापना हुई। और इस ऐतिहासिक पल का गवाह बना राजस्थान। राजस्थान के नागौर जिले के बगधरी गांव में तत्कालीन प्रधानमन्त्री जवाहरलाल नेहरू ने इसी दिन पंचायती राज व्यवस्था की स्थापना की थी। ऐसे में राजस्थान आधुनिक भारत में पंचायती राज व्यवस्था लागू करने वाला पहला राज्य बन गया। 2 अक्टूबर के दिन ही पंचायती राज व्यवस्था को लागू करने के पीछे का एक कारण यह भी था कि महात्मा गाँधी का मानना था कि देश के राजनीतिक ढाँचे की नींव पंचायती राज होनी चाहिए, जिससे देश के हर एक गाँव में शासन व्यवस्था को मज़बूती मिले। इसी के चलते जवाहरलाल नेहरू ने जब पहली बार पंचायती राज की स्थापना करने का फैसला किया, तो उन्होंने महात्मा गाँधी के जन्म दिवस को इस कार्य के लिए चुना। इसके बाद 24 अप्रैल 1993 को देश में पहली बार पंचायती राज अधिनियम पारित हुआ।

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