सात धारों के नाम से प्रसिद्ध है हिमाचल प्रदेश का बिलासपुर जिला

सबसे बड़ी मानव निर्मित, गोविन्द सागर झील यहाँ है मौजूद …

शिवाक्ष शर्मा 

भारत व पाकिस्तान के बंटवारे के बाद जब बिलासपुर 12 अक्टूबर 1948 को अलग राज्य बना तो राजा आनंद चंद इसके मुख्यायुक्त बने। 1 जुलाई 1954 को हिमाचल प्रदेश में बिलासपुर का विलय कर दिया गया और राजा आनंद चंद के स्वतंत्र कहलूर राज्य का सपना टूट गया। इस तरह से बिलासपुर भी हिमाचल प्रदेश का पांचवां जिला बन गया। जिले की सीमाएं मंडी, हमीरपुर, ऊना, सोलन के साथ सटी हैं। बिलासपुर का क्षेत्रफल 1167 वर्ग किलोमीटर है। बिलासपुर विशुद्ध रूप से पर्वतीय क्षेत्र है और इसे सात धारों के नाम से देशभर में जाना जाता था। इन सात धारों में धार नयना देवी, कोटधार, धार झंजियार, धार तियूण और धार स्त्रियुन, धार बंदला और बहादुरपुर धार।

राज सत्ता खत्म होते ही बिलासपुर में विकास के नए युग की शुरुआत हुई और यहां अब आशातीत विकास हर क्षेत्र में हुआ है। बिलासपुर में भाखड़ा बांध के निर्माण की योजना संयुक्त पंजाब के लेफ्टिनेंट गर्वनर लुईस डान के समय 1918 में बनाई गई। इसका निर्माण 1948 में शुरू हुआ और 1963 में इसे पूरा किया गया। सुप्रसिद्ध सांडू मैदान, यहां स्थित बाजार, मंदिर, प्राचीन महल, दो सौ के करीब गांव, चौंटा घाटी का उपजाउ क्षेत्र सहित सब नौ अगस्त 1961 को जलमग्न हो गया। अब यहां उन स्थानों पर विश्व की सबसे बड़ी मानव निर्मित गोविंद सागर झील है। इसमें मत्स्य पालन, नौकायान, जल क्रीड़ा सहित अनेक रोजगार के साधन उपलब्ध हैं।

राजा आनंद चंद ने जब भाखड़ा में पुराने शहर के जलमग्न होने का मसला भारत सरकार से उठाया था तो उस समय भारत सरकार के चीफ आर्केटेक्ट जुगलेकर ने नए शहर का नक्शा बनाया था। नगर का निर्माण 1956 में शुरू हुआ था और 1963 में बनकर तैयार हुआ था। प्रथम अवस्था में इसे रौड़ा, डियारा और चंगर तीन सेक्टर के प्रारूप से पहचाना गया, लेकिन इसके बाद लोगों ने अपनी मर्जी से भवन बनाना शुरू कर दिया और आर्केटेक्ट के मुताबिक यह शहर विकसित नहीं हो सका।

जिला बिलासपुर में सबसे बड़ा पावन स्थल नयना देवी मंदिर माना जाता है। यह ऐतिहासिक मंदिर हिंदुओं और सिखों का अति पावन स्थली है। दसवीं पातशाही गुरु गोविंद सिंह की माता नयना देवी के प्रति असीम विश्वास और श्रद्धा थी। इसके साथ ही नाहर सिंह मंदिर, व्यास गुफा, मार्कंडेय ऋषि मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थल हैं।

स्वास्थ्य की दृष्टि से बिलासपुर में एम्स संस्थान का निर्माण कोठीपुरा में हुआ है। जिले में रेलवे लाइन पहुंचाने का कार्य प्रगति पर है। फोरलेन के प्रोजेक्ट प्रगति पर हैं। शिक्षा, उद्योग सहित हर वर्ग में बिलासपुर जिला अब उन्नत जिलों की सूची में शामिल है।

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