2 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है विश्व नारियल दिवस, जानें इतिहास और महत्व

हनुमानगढ़ के पारस माली ने लिखा है यह आर्टिकल…

बाल लेखक पारस माली

विश्व नारियल दिवस 2023: केवल स्वास्थ्य के लिहाज से ही नहीं बल्कि आर्थिक रूप से भी नारियल के महत्व को समझने के लिए हर साल विश्व नारियल दिवस मनाया जाता है। नारियल का इस्तेमाल हम खाने पीने से लेकर सजावट तक करते हैं। हर साल 2 सितंबर को पूरी दुनिया में विश्व नारियल दिवस मनाया जाता है। प्रकृति के सबसे कीमती उत्पादों में से एक नारियल का इस्तेमाल खाने पीने से लेकर सजावट तक हर चीज में किया जाता है। नारियल का इस्तेमाल भारतीय और विदेशी भोजन में भी किया जाता है। एशियाई एवं पैसफिक क्षेत्र के सभी नारियल उत्पादक देश इंटरनेशनल कोकनट कम्युनिटी (ICC) की स्थापना यानी 2 सितंबर को हुई थी। नारियल दिवस मनाने का उद्देश्य नारियल के प्रति जागरूकता बढ़ाना, अहमियत बताना और इस फसल की ओर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करना है। सालों से, इस दिन को “नारियल के लाभ” और “इसका क्या उपयोग होता है” इस विषय में लोगों को जागरूक किया जाता है।

क्या है विश्व नारियल दिवस का इतिहास:  विश्व नारियल दिवस पहली बार वर्ष 2009 में मनाया गया था इस दिन को एशियाई और प्रशांत नारियल समुदायों द्वारा बड़े उत्साह के साथ मनाया गया था। इसे मनाने का मुख्य कारण दुनिया भर में नारियल की खेती के बारे में लोगों को जागरूक करना और इसकी क्या उपयोग है वह बताना था। “कैसे यह नारियल एक व्यक्ति के लिए लाभदायक बन सकता है” इस विषय में लोगों को जागरूक करना इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य है।

आपको बता दे कि वर्तमान में 18 देशों के सदस्य एक अंतर सरकारी संगठन के रूप में कम कर रहे हैं जिसमें भारत भी शामिल है। वहीं एशिया प्रशांत में नारियल समुदाय का हेड ऑफिस इंडोनेशिया के जकार्ता में है. इंडोनेशिया, दुनिया में सबसे ज्यादा नारियल का उत्पादन करता है.

आपको बता दें कि डिजिटल बाल मेला ने हाल ही में एक प्रतियोगिता की शुरुआत की है जिसमें बच्चों को सितंबर माह में आने वाले महत्वपूर्ण दिनों पर आर्टिकल लिखना है। इस प्रतियोगिता का आयोजन बच्चों की लेखन कला को दुनिया के सामने लाने के लिए किया गया। इस प्रतियोगिता में बच्चों को कम से कम से कम 3 दिनों के ऊपर आर्टिकल लिखने होंगे। विजेता बच्चे को “राइटर ऑफ द मंथ” का खिताब दिया जाएगा और 1100 रुपए का ईनाम भी विजेता बच्चे को मिलेगा।

डिजिटल बाल मेला बच्चों द्वारा स्थापित एक प्लेटफॉर्म हैं जो बच्चों में जागरूकता लाने का और अपनी कला को दिखाने का एक मंच प्रदान करता है। डिजिटल बाल मेला सूचना प्रौद्योगिकी की शक्ति का उपयोग करके बच्चों को उनके रचनात्मक पक्ष को उजागर करने में मदद कर रहा है और इसे जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है।

आपको बता दें डिजिटल बाल मेला की शुरुआत 2020 में जयपुर की रहने वाली 10 साल की जान्हवी शर्मा ने की थी। डिजिटल बाल मेला अब तक कई अभियानों का आयोजन कर चुका है जिसमें “राजस्थान विधानसभा बाल सत्र”, “हिमाचल प्रदेश विधानसभा बाल सत्र”, “मैं भी बाल सरपंच” आदि शामिल है।

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